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छत्तीसगढ़ के धमतरी में नेचर एंड वाइल्डलाइफ (NWD) द्वारा पक्षियों के लिए निशुल्क सकोरा वितरण किया गया। यह इस पहल का 11वां वर्ष है, जिसमें करीब 3 हजार सकोरे लोगों को दिए गए। इस वितरण कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी भी शामिल हुए। संगठन का उद्देश्य बेजुबान पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना है। इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है, जिससे इंसान भी धूप से बचने के लिए छाते और स्कार्फ का सहारा ले रहे हैं। लोगों के लिए प्याऊ की व्यवस्था है, लेकिन बेजुबान पक्षियों को पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलना पड़ता है और वे घरों के आसपास दिखाई देते हैं। इन्हीं पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए NWD धमतरी हर साल हजारों सकोरे वितरित करता है। यह आयोजन शहर के घड़ी चौक पर किया गया, जिसका लाभ हजारों लोगों ने उठाया। वितरण के दौरान लोगों से सकोरों में पानी भरकर अपने घरों में रखने का आग्रह किया गया। इस कार्यक्रम में समाजसेवी पंडित राजेश शर्मा, वनमंडलाधिकारी कृष्ण जाधव सहित नेचर एंड वाइल्डलाइफ ऑफ धमतरी और युवा ब्रिगेड के सदस्यों ने अपनी सहभागिता निभाई। कुछ लोगों ने इस नेक कार्य को देखते हुए स्वयं भी सकोरा वितरण में हिस्सा लिया। नेचर एंड वाइल्डलाइफ ऑफ धमतरी के सदस्य भूमि मूलवानी, समीर जैन और जयदीप बिश्वास ने बताया कि यह निशुल्क सकोरा वितरण पिछले 10 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है, और यह 11वां वर्ष है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत पहले साल 500 सकोरों के वितरण से हुई थी। ये सकोरे मिट्टी से बने होते हैं, जिनमें पानी भरकर पक्षियों को पिलाया जा सकता है। वितरण के साथ पोस्टर भी दिए जाते हैं, जिनमें पक्षियों के लिए पानी रखने और अन्य संबंधित जानकारी दी जाती है। इस वर्ष करीब 3500 सकोरे वितरित किए गए। उन्होंने बताया कि वे अलग-अलग पक्षियों का अध्ययन भी करते हैं। धमतरी के गंगरेल, मड़मसिल्ली, रुद्री और अन्य जगहों पर वे करीब ढाई सौ पक्षियों की पहचान कर चुके हैं और उनका रिकॉर्ड भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि पक्षियों के लिए सकोरा वितरण किया जा रहा है और आगे इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इस अभियान को लोगों से अच्छा समर्थन मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे गर्मी में इंसानों के लिए पानी की व्यवस्था की जाती है, वैसे ही बेजुबान पक्षियों के लिए भी दाना और पानी की व्यवस्था करना जरूरी है।
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