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दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के ‘समन्वय पोर्टल’ और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के आधार पर 350 से अधिक संदिग्ध बैंक खाताधारकों के खिलाफ अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन खातों का उपयोग देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि कई बैंक खातों में साइबर अपराध से जुड़ी रकम सीधे ट्रांसफर की गई थी। इन खातों को ‘लेयर-1 म्यूल अकाउंट’ के रूप में चिन्हित किया गया है। साइबर अपराध में म्यूल अकाउंट वे होते हैं जिनका उपयोग ठगी की रकम को छिपाने और असली अपराधियों की पहचान गुप्त रखने के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से बड़ी संख्या में संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाला गया, जिससे खाताधारकों द्वारा अवैध आर्थिक लाभ अर्जित करने की आशंका बढ़ गई है। थाना पुरानी भिलाई क्षेत्र में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के कई खातों की जांच की गई। प्राथमिक जांच में इन खातों में साइबर ठगी से जुड़ी रकम जमा होने का पता चला। इसके बाद संबंधित खाताधारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि खाताधारकों ने स्वयं या दूसरों के साथ मिलकर अपने खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने में किया। कई खातों से रकम तुरंत दूसरे खातों में भेजी गई, जिससे एक संगठित नेटवर्क की संभावना और गहरी हो गई है। सुपेला में बंधन बैंक के खातों पर सबसे बड़ी कार्रवाई थाना सुपेला क्षेत्र में संचालित बंधन बैंक के खातों की जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा हुआ। यहां बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते मिले, जिनमें साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम ट्रांसफर होने के प्रमाण मिले हैं। पुलिस ने सैकड़ों बैंक खातों को जांच के दायरे में लिया है। जानकारी के मुताबिक कई खातों का उपयोग अलग-अलग राज्यों में हुई ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजना, डिजिटल अरेस्ट, KYC अपडेट और OTP फ्रॉड जैसी घटनाओं में किया गया। पुलिस अब खाताधारकों की भूमिका, बैंकिंग ट्रेल और रकम के अंतिम गंतव्य की जांच कर रही है। उतई में IDFC बैंक के 30 खातों पर FIR थाना उतई क्षेत्र में संचालित IDFC बैंक के लगभग 30 संदिग्ध खातों की जांच की गई। पुलिस को यहां भी साइबर ठगी की रकम सीधे जमा होने के इनपुट मिले। इसके बाद संबंधित खाताधारकों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि खाताधारक केवल कमीशन के बदले खाते उपलब्ध करा रहे थे या वे पूरे साइबर गिरोह का सक्रिय हिस्सा थे। पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और KYC दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी बोले- साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई जारी सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से प्राप्त शिकायतों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कई खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने और ट्रांसफर करने में किया गया। उन्होंने कहा कि जिले में साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिन खातों में ठगी की रकम प्राप्त हुई है, उनके खाताधारकों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आगे गिरफ्तारी और बैंक खातों को फ्रीज करने जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। साइबर ठगी में ‘म्यूल अकाउंट’ बन रहे सबसे बड़ा हथियार साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार देशभर में ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले गिरोह अब सीधे अपने खातों का उपयोग नहीं करते। वे बेरोजगार युवकों, महिलाओं , मजदूरों या लालच में आए लोगों के बैंक खाते किराए पर लेकर उनमें ठगी की रकम मंगाते हैं। इसके बदले खाताधारकों को कमीशन दिया जाता है।
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