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दुर्ग जिले में पीलिया का प्रकोप बढ़ता नजर आ रहा है। टाउनशिप के सेक्टर-7 इलाके में पिछले 6 दिनों में कुल 37 मरीज सामने आ चुके हैं। मंगलवार को एक और नए मरीज की पुष्टि हुई, जबकि सोमवार को ही 5 नए केस मिले थे। लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम पिछले 6 दिनों से इलाके में लगातार सर्वे कर रही है और मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच की जा रही है। अभी की स्थिति में 6 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। सोमवार को मिले 5 मरीजों में से 3 को भर्ती करना पड़ा था। वहीं पहले से भर्ती 4 मरीजों में से 2 के ठीक होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद नए मरीजों के आने से भर्ती मरीजों की संख्या फिर 6 हो गई है। 13 मरीजों की जांच में 1 मिला पॉजिटिव
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सीबीएस बंजारे के मुताबिक सेक्टर-7 में तेजी से मरीज सामने आए हैं। टीम ने सोमवार को 110 घरों का सर्वे किया था, जबकि मंगलवार को भी करीब 110 घरों की जांच की गई। इस दौरान 13 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए, जिनमें से 1 मरीज पॉजिटिव मिला है। लोग जांच करवाने आ रहे सामने
डॉक्टरों का कहना है कि इस इलाके में दो दिनों में ही 6 नए मरीज मिले हैं। सभी संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) की टीम भी मौके पर कैंप लगाकर लोगों का इलाज कर रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत जांच कर रही है। संदिग्ध मरीज अब सामने आकर खुद से जांच करवा रहे हैं, इससे संक्रमण का खतरा आगे जाकर कुछ कम हो सकता है। चंदुलाल में भर्ती करवाया गया मरीज
मंगलवार को मिले नए मरीज का बिलरुबिन लेवल 10.3 पाया गया है, जिसे चंदुलाल चंद्राकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन मरीजों का बिलरुबिन ज्यादा है, उन्हें भर्ती किया जा रहा है, जबकि हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर पर ही इलाज की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों से अपील कर रही है कि वे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और जरूरत होने पर अस्पताल में भर्ती हों। डॉक्टरों के अनुसार पीलिया के लक्षण 14 से 15 दिन तक रहते हैं, लेकिन सही इलाज से 3 से 4 दिन में मरीज की हालत में सुधार होने लगता है। पहले कई लोगों ने बीमारी छिपाने की कोशिश की
डॉक्टरों का कहना है कि जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई लोगों ने शुरुआत में बीमारी छिपाने की कोशिश की, जिससे संक्रमण फैलने में मदद मिली। जब इलाके में कैंप लगाए गए, तब लोगों ने जांच कराई और बड़ी संख्या में मरीज सामने आए। फिलहाल इलाके में पानी की पाइपलाइन बदलने का काम भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि संक्रमण के स्रोत को रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या कम होने लगेगी।
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