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दुर्ग जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर नगपुरा के पास अंजोरा (ढाबा) गांव गंभीर संकट से जूझ रहा है। यहां “शराब सस्ती और पानी महंगा” की कड़वी सच्चाई सामने आई है, जहां एक ओर ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव में अवैध शराब खुलेआम बेची जा रही है। यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। गांव की लगभग 3000 की आबादी के लिए पेयजल का एकमात्र सहारा एक बोरवेल है, जिससे केवल 1 एचपी की क्षमता से पानी निकलता है। हालात इतने बदतर हैं कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने वालों की लंबी कतार लग जाती है, जो रात 11 बजे तक जारी रहती है। रोजगार और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही जानकारी के अनुसार छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी अपने-अपने बर्तन लेकर लाइन में खड़े थे। पानी लाने में ही दिन का बड़ा हिस्सा निकल जाने के कारण ग्रामीणों का रोजगार और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। पानी की कमी ने गांव के दैनिक जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। अवैध शराब की बिक्री हो रही है गांव में खुलेआम शराब बेची जा रही है। यह स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है, जब पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए लोग तरस रहे हैं, लेकिन नशा आसानी से उपलब्ध है। पूर्व सरपंच का आरोप: “शराब ने बिगाड़ दिया माहौल” गांव के पूर्व सरपंच सुमरन साहू ने स्वीकार किया कि गांव में पानी और अवैध शराब दोनों बड़ी समस्याएं हैं। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। पुलिस आती है, लेकिन यह कहकर लौट जाती है कि पर्याप्त मात्रा में शराब नहीं मिली। उनका कहना है कि अवैध शराब ने गांव का माहौल खराब कर दिया है। ग्रामीणों ने कहा 31 लाख रुपए पानी में बह गए पिछले साल कलेक्ट्रेट घेराव के बाद 31 लाख रुपए की लागत से शिवनाथ नदी से पानी लाने की योजना बनाई गई थी। उपसरपंच नरेंद्र धनकर के अनुसार, यह योजना समय पर शुरू नहीं हुई। यदि इसे पहले लागू किया गया होता, तो जलस्तर बना रहता और आज यह संकट नहीं होता। ग्रामीण गोपी निर्मलकर ने आरोप लगाया कि इस योजना से गांव को कोई फायदा नहीं हुआ। नदी का पानी केवल डेम में भरा जा रहा है, जो पीने योग्य नहीं है। उनका कहना है “31 लाख रुपए पानी में बह गए, लेकिन गांव प्यासा ही रह गया।” “शराब सस्ता, पानी महंगा”: ग्रामीणों का गुस्सा ग्रामीण सुरेंद्र देशमुख ने कहा “हमारे गांव में शराब सस्ता है, लेकिन पानी महंगा है। ”गांव में 8-10 लोग अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कारोबार को संरक्षण मिल रहा है और विरोध करने पर झगड़े की स्थिति बन जाती है। यहां तक कि छोटे बच्चे और मजदूर वर्ग भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे सामाजिक स्थिति और खराब हो रही है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौप कर चेतावनी दी ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर चेतावनी दी है कि यदि पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन करेंगे।उन्होंने पाइपलाइन निर्माण में गुणवत्ताहीन काम और भ्रष्टाचार की जांच की मांग भी की है। कई गांवों में पानी का संकट दुर्ग जिले के अन्य गांवों में भी पानी संकट की शुरुआत हो चुकी है। पाटन के औरी सहित उतई थाना क्षेत्र के मुड़पार , मर्रा, चुनकट्टा , अचानकपुर , सेलूद, छाटा सहित अनेकों गांव पानी की किल्लत शुरू हो चुकी है तो वही अवैध शराब की बिक्री जोरों पर हो रही है। प्रशासन और पुलिस का पक्ष उतई थाना प्रभारी महेश ध्रुव का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और संरक्षण के आरोप निराधार हैं। एएसपी (ग्रामीण) मणि शंकर चंद्रा ने भी दावा किया कि जिले में रोजाना कार्रवाई हो रही है और शाम से रात तक गश्त की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा दुर्ग जिले के थानों में अवैध नशे के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। दुर्ग लोकसभा सांसद बोले दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि यदि अवैध शराब की शिकायत मिलती है, तो पुलिस और आबकारी विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। पानी संकट पर उन्होंने जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी बताया और 50 गांवों की योजना में देरी पर अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही।
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