छत्तीसगढ़ के धमतरी में सोमवार को 45 गांवों के हजारों आदिवासियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या मे
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प्रदर्शनकारी शांति घाट से करीब 10 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारी राशन-पानी के साथ पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव में वो लोग रहते हैं वहां के हालात नरक से भी ज्यादा बदहाल है। वे लोग सिर्फ और सिर्फ भगवान के भरोसे जी रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया। नगरी और आसपास के पेट्रोल पंपों को दोपहर 1 बजे तक पेट्रोल स्टेशनों को बंद कर दिया और डीजल देने पर रोक लगा दी गई। लेकिन प्रदर्शनकारी धमतरी की ओर बढ़े।
बनरौद के पास पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए सड़क पर बैरिकेड लगा दिए और बीच सड़क में ट्रक खड़े कर दिए। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रहे।
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कुछ मांगों को तुरंत पूरा करने और कुछ मांगों को जल्द ही पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण अपने-अपने गांव लौटे।
पहले देखिए ये तस्वीरें-

45 गांव के आदिवासी ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धमतरी पहुंचे।

जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले यह प्रदर्शन हुआ।

स प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए।

ग्रामीणों को रोकने आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया।
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, धमतरी में सोमवार को वनांचल क्षेत्र के करीब 45 गांवों के हजारों आदिवासी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और 7 बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। ये प्रदर्शनकारी जल- जंगल-जमीन संघर्ष समिति धमतरी-गरियाबंद के बैनर तले एकजुट हुए थे।
सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे नगरी ब्लॉक में बड़ी संख्या में आदिवासी एकत्र हुए। इनमें महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा शामिल थे। सभी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धमतरी कलेक्ट्रेट का घेराव करने निकले। ग्रामीणों का कहना था कि वे सालों से सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

हजारों की संख्या में ग्रामीण अपने साथ राशन लेकर आए थे।
350 से ज्यादा का पुलिस बल बुलाया गया
इधर, प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग सतर्क रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रायपुर रेंज से करीब 350 से ज्यादा का पुलिस बल बुलाया गया था। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, साथ ही बैरिकेडिंग कर आवाजाही को कंट्रोल किया गया।
प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। हालांकि, पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रही।

रायपुर रेंज से करीब 350 का पुलिस बल तैनात किया गया था।
करीब दोपहर साढ़े 12 बजे हजारों की संख्या में ग्रामीण शांति घाट पहुंचे। यहां वे पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ गए। रास्ते भर वे अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे।प्रदर्शनकारियों के हाथों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें थीं और वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे।

40 से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों का विरोध
ग्रामीणों ने कहा 40 से ज्यादा गांवों की स्थिति बहुत खराब है। यहां न सड़क, न पुल-पुलिया, न स्कूल और न ही स्वास्थ्य सुविधा है। लोग सिर्फ भगवान भरोसे जीवन जी रहे हैं। वे कई पीढ़ियों से विकास की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि वन विभाग भी विकास कार्यों में बाधा डाल रहा है।

उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज टाइगर रिजर्व बनने से पहले से यहां रह रहे हैं, जबकि टाइगर रिजर्व 2009 में बनाया गया था। ग्रामीणों ने इसे अपने अधिकारों का उल्लंघन बताया है। कहा कि एक महीने का राशन-पानी लेकर आए हैं, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

महिलाओं ने कहा- अस्पताल की सुविधा नहीं है।
जंगल इलाके में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि उन्हें अपने अधिकारों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वे दूर-दूर से यहां आती हैं, लेकिन रास्ते में उन्हें कई बार रोका जाता है।
महिलाओं का कहना है कि वे जंगल क्षेत्र में रहती हैं, जहां अस्पताल की सुविधा नहीं है। डिलीवरी के समय सही इलाज न मिलने के कारण कई बार मां और बच्चे दोनों की जान नहीं बच पाती।
उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों के लिए स्कूल जाने की कोई अच्छी सड़क नहीं है। बच्चे कीचड़ भरे रास्तों से होकर स्कूल जाते हैं। कुल मिलाकर वहां के ग्रामीण बहुत कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा के आश्वासन के बाद ग्रामीण लौटे।
सड़क और पुल की मांग पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन
कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के ग्रामीण अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आए थे। यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, इसलिए यहां विकास कार्यों के लिए अलग नियम और प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। मुख्यमंत्री की ओर से पुल निर्माण के निर्देश दिए गए हैं, जिस पर काम किया जाएगा। कुछ सड़कों के निर्माण के लिए स्वीकृति लेने की प्रक्रिया चल रही है।

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