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दावड़ा विश्वविद्यालय में अंधश्रद्धा के खिलाफ वैज्ञानिक जागरूकता विषय पर कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यक्रम में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। डॉ. मिश्र ने कहा कि समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। विद्यार्थियों को विज्ञान, तर्क और समझ के आधार पर सोच विकसित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि शिक्षा और तकनीक में प्रगति के बावजूद अंधविश्वास आज भी समाज में मौजूद है। इसके कारण कई निर्दोष लोग प्रताड़ना का शिकार होते हैं, इसलिए वैज्ञानिक सोच का प्रसार जरूरी है। तर्क, चर्चा और विश्लेषण का महत्व डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण तर्कशीलता से जुड़ा है। यह सोच इंसान में खोज की प्रवृत्ति बढ़ाती है और सही निर्णय लेने में मदद करती है। उन्होंने इसे संविधान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि वही बात सही मानी जानी चाहिए जो प्रयोग और परिणाम से साबित हो सके। सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय परीक्षण और अवलोकन जरूरी है। अंधविश्वास के कारण सामाजिक नुकसान डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि जादू-टोना, टोनही, बलि और बाल विवाह जैसी कुरीतियां आज भी समाज में मौजूद हैं, जिनसे कई लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने समझाया कि बीमारियों का कारण अलग-अलग होता है और उनका इलाज भी वैज्ञानिक तरीके से ही संभव है। झाड़-फूंक या टोटकों से इलाज संभव नहीं है। कोरोना महामारी में विज्ञान की भूमिका डॉ. मिश्र ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी से निपटने में वैक्सीन और चिकित्सा विज्ञान की अहम भूमिका रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्याओं का समाधान विज्ञान से ही संभव है। उन्होंने कहा कि बच्चों को भूत-प्रेत जैसी बातों से डराने के बजाय उनमें आत्मविश्वास और निडरता विकसित करनी चाहिए। टोनही प्रथा और प्रताड़ना गंभीर समस्या डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि कई राज्यों में टोनही के संदेह में महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है, जो अमानवीय और शर्मनाक है। उन्होंने इसे पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि चमत्कार के नाम पर दिखाए जाने वाले मामलों में अक्सर हाथ की सफाई या साधारण वैज्ञानिक कारण होते हैं। लोगों को ऐसे धोखों से बचना चाहिए। भूत-प्रेत का कोई अस्तित्व नहीं डॉ. मिश्र ने स्पष्ट किया कि भूत-प्रेत जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ऐसे मामलों में मानसिक कारण या शरारती तत्वों की भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि चमत्कारिक इलाज के झूठे दावों पर कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। लोगों को बीमारी में चिकित्सकों से ही उपचार कराना चाहिए। सामाजिक सुधार में सभी की भागीदारी जरूरी डॉ. मिश्र ने कहा कि अंधविश्वास और कुरीतियों को खत्म करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें हर व्यक्ति को योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। अंत में प्रो. मनीष वर्मा ने आभार व्यक्त किया और डॉ. सुनील कश्यप ने कार्यशाला का संयोजन किया।
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