छत्तीसगढ़ में अब घरों तक पाइपलाइन से रसोई गैस (पीएनजी) और वाहनों के लिए सीएनजी नेटवर्क तेजी से बढ़ाने की तैयारी पूरी हो गई है। राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति-2026’ लागू कर दी है। नई नीति में गैस कंपनियों के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान बनाई गई है और निजी जमीन, सड़क खुदाई, सुरक्षा, मुआवजा व निगरानी को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। योजना का नोडल विभाग खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग होगा। केंद्र सरकार ने 2030 तक देश की कुल ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6.2% से बढ़ाकर 15% करने का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह नीति लागू की है। नई नीति का सबसे बड़ा प्रावधान ‘डीम्ड अप्रूवल’ है। यानी यदि किसी गैस कंपनी ने पाइपलाइन बिछाने के लिए आवेदन किया और संबंधित विभाग ने 15 दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया, तो अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी। इसके बाद कंपनी को सिर्फ अपनी वेबसाइट और दो स्थानीय समाचार पत्रों में इसकी सूचना प्रकाशित करनी होगी। सरकार दो महीने के भीतर ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम भी शुरू करेगी। इससे कंपनियों को विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी मंजूरी एक ही प्लेटफॉर्म से मिल जाएंगी। कंपनियों को चार महीने में काम पूरा करना होगा
मंजूरी मिलने के बाद गैस कंपनियों को चार महीने के भीतर पाइपलाइन बिछानी होगी। तय समयसीमा का पालन नहीं करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है। यदि गैस पाइपलाइन किसी निजी जमीन से गुजरती है, तो जमीन मालिक को संबंधित भूमि के कमर्शियल रेट का 10% मुआवजा दिया जाएगा। अगर जमीन मालिक 24 घंटे में सहमति दे देता है, तो उसे दोगुना यानी 20% मुआवजा मिलेगा। हालांकि, हाउसिंग सोसायटी और आरडब्ल्यूए इस मुआवजा व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे।
नए मकानों में ‘गैस-इन’ पाइपलाइन अनिवार्य
सरकार ने शहरी विकास से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब शहरों के मास्टर प्लान में गैस नेटवर्क के लिए जगह सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा नए मकानों और कॉमर्शियल भवनों में निर्माण के दौरान ही ‘गैस-इन’ पाइपलाइन फिटिंग की सुविधा देना जरूरी होगा। कंपनियों को देनी होगी 1000 रुपए किमी फीस
रास्ते के अधिकार के लिए कंपनियों को सिर्फ 1000 रुपए प्रति किलोमीटर की तय फीस देनी होगी। गैस का वाल्व चेंबर (5×10 वर्गफीट तक) लगाने पर भी कमर्शियल रेट का केवल 10% शुल्क लगेगा। सड़क खोदने और उसे पहले जैसी स्थिति में बहाल करने के लिए विभागों ने बैंक गारंटी की राशि भी तय कर दी है। कंपनियों को प्रचार-प्रसार भी करना होगा
नीति के तहत अधिकृत गैस कंपनियों को सिर्फ पाइपलाइन बिछाने का काम नहीं करना होगा, बल्कि मीडिया के जरिए लोगों को PNG और CNG के फायदे भी बताने होंगे। साथ ही कंपनियों को अपनी प्रगति की त्रैमासिक रिपोर्ट नोडल विभाग को सौंपनी होगी। यदि किसी आवेदन को खारिज किया जाता है, तो विभाग को उसका कारण बताना होगा। कंपनी को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा और उसके सात दिन बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। केवल वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया जा सकेगा।
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