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दक्षिण बस्तर में अब तक सक्रिय रही नक्सलियों की बटालियन ने भी घुटने टेक दिए हैं। शनिवार को बटालियन के आखिरी कमांडर विज्जा (हेमला इथ्थु) ने अपने 46 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है। इसी के साथ देश में नक्सलियों की पहली और इकलौती बटालियन पूरी तरह खत्म हो गई है। विज्जा समेत ज्यादातर लड़ाके बटालियन की 9वीं प्लाटून के सदस्य थे, जिनके खौफ से दक्षिण बस्तर लंबे अरसे तक कांपता रहा। ये आत्मसमर्पित नक्सली अपने साथ एलएमजी, एके-47 और इंसास जैसे 32 घातक हथियारों के साथ 515 जिंदा कारतूस लेकर आए हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 1.50 करोड़ रुपए का इनाम था। सरकार ने पुनर्वास नीति के तहत फौरी फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से प्रत्येक नक्सली के लिए 25-25 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की है। दंडकारण्य स्पेशल जोजन कमेटी (डीकेएसजेडसी) के 47 कैडरों के एकसाथ आत्मसमर्पण करने से साफ है कि बस्तर अब निर्णायक शांति की ओर आगे बढ़ रहा है। कई नक्सलियों का तेलंगाना में सरेंडर: 2026 में अब तक 260 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर तेलंगाना में सरेंडर किया है। इनमें बड़ी तादाद में दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सली शामिल हैं। बस्तर में सक्रिय कई बड़े नक्सलियों ने सरेंडर के लिए तेलंगाना को चुना है। इसके पीछे तेलंगाना की पुनर्वास नीति और त्वरित राहत के सिस्टम को बताया जा रहा है। अब एसडीएम और एडीओपी के सामने सरेंडर कर सकेंगे नक्सली, केंद्र ने सौंपी जिम्मेदारी कौशल स्वर्णबेर की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय माओवादियों के आत्मसमर्पण और उनके पुनर्वास को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब नक्सली एसपी कलेक्टर ही नहीं, एसडीएम और एसडीओपी के सामने भी आत्मसमर्पण कर सकेंगे। इसके साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा दी गई जानकारियों को दर्ज करने और उनके प्रोफाइल को अपडेट करने के लिए जिला पुलिस अधीक्षकों को अधिकृत कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि अक्सर आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों के पुराने रिकॉर्ड और उनके द्वारा दी गई जानकारियों के मिलान में काफी समय लगता था। केंद्र सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्ययोजना’ के तहत राज्य सरकार ने सीधे ग्राउंड लेवल के अफसरों को यह जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि पुनर्वास की प्रक्रिया तेज हो सके। राज्य शासन के गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर माओवादियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया को और अधिक चुस्त-दुरुस्त कर दिया है। कोई भी वामपंथी उग्रवादी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, जिला मजिस्ट्रेट, जिला एसपी, रेंज आईजी, डीआईजी, आईजी आपरेशन, स्पेशल ब्रांच के आईजी, डीआईजी, एसपी, एसडीएम या एसडीओपी के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है।
उन्हें यह विशेष छूट है कि वे चाहें तो छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर भी सेना या सीएपीएफ की किसी भी यूनिट के सामने जाकर सरेंडर कर सकते हैं। कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
जानकारी की रिकॉर्डिंग: जब कोई नक्सली आत्मसमर्पण करेगा, तो अधिकृत अधिकारी एक विशेष फॉर्म (प्रोफार्मा) में उसकी पूरी जानकारी भरेगा। यह जानकारी सरेंडर और पुनर्वास अधिकारी को भेजी जाएगी, जो इस बात की जांच करेंगे कि सरेंडर करने वाला व्यक्ति वास्तव में नक्सली कैडर का हिस्सा रहा है या नहीं।
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