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कारोबारियों को ट्रेड लाइसेंस जारी करने के लिए उपयोग होने वाला चिप्स (छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी) का सॉफ्टवेयर करीब एक महीने से बंद पड़ा है। नतीजा प्रदेशभर में 50 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित हैं। लाइसेंस नहीं बनने से नया कारोबार शुरू नहीं हो पा रहा है। वहीं पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण भी अटका है। राज्य सरकार ने हाल ही में ट्रेड लाइसेंस का दायरा बढ़ाते हुए इसे छोटे-बड़े सभी कारोबारियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। अब होटल, मॉल और अस्पताल संचालकों के साथ गली-मोहल्लों की किराना दुकानों, फेरी लगाने वालों और घूम-घूमकर सामान बेचने वालों को भी लाइसेंस लेना जरूरी है। सरकार ने लाइसेंस शुल्क तय करने की व्यवस्था भी बदल दी है। अब फीस दुकान के आकार और सड़क की चौड़ाई के आधार पर तय होगी। अलग-अलग श्रेणी के कारोबारियों के लिए अलग शुल्क निर्धारित किए जाने हैं। इसके लिए नया सॉफ्टवेयर विकसित करने की जिम्मेदारी चिप्स को दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक नया सॉफ्टवेयर तैयार तो कर लिया गया है, लेकिन नई व्यवस्था के अनुरूप उसे लागू करने में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इसी वजह से नया सिस्टम शुरू नहीं हो सका और पुराना सिस्टम भी बंद पड़ा है, जिससे कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। नए सिस्टम की अब तक न ही ट्रेनिंग हुई और न ही कोई जानकारी दी गई राज्य शासन के नए नोटिफिकेशन के अनुसार ट्रेड लाइसेंस जारी करना, पुराने सिस्टम से बहुत अलग है। पहले कारोबार के आधार पर लाइसेंस मिलता था। इसकी फीस कारोबार के आकार और कर्मचारी संख्या के आधार पर तय होती थी। नई व्यवस्था में दुकान के क्षेत्रफल और सड़कों की चौड़ाई के आधार पर फीस तय की जानी है। इसमें दिक्कत यह है कि आवेदक द्वारा दी गई दुकान के आकार की जानकारी की जांच कैसे होगी? च्वाइस सेंटर से इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है। वहां से आवेदन निगम के पास पहुंचने पर निगम इसकी कैसे जांच कराएगा? संशोधन की स्थिति में अतिरिक्त फीस का भुगतान करने वाला सिस्टम कैसा होगा? नई व्यवस्था के लिए अभी तक नगर निगम के अधिकारियों और च्वाइस सेंटरों के संचालकों की ट्रेनिंग नहीं हुई है।
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