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दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र में मंगलवार रात हुई चाकूबाजी की घटना में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल डंडे और धारदार हथियार बरामद किए गए हैं। इस मामले में तीन नाबालिगों के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की गई है। हालांकि, पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि यदि उनकी शिकायत पर शाम को ही कार्रवाई की जाती, तो रात में हुई यह वारदात रोकी जा सकती थी। पुलिस के अनुसार, बाम्बे आवास घासीदास नगर, जामुल निवासी रूखमणी मारकण्डेय की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में बताया गया कि 16 जून की रात करीब आठ बजे पुराने विवाद और आपसी रंजिश के चलते मोहल्ले के हर्ष साहू उर्फ अंशु, दिनेश साहू उर्फ दीनू, विजय यादव उर्फ करण यादव, परिचय उर्फ गुलशन यादव, मोहम्मद आसिफ और उनके साथियों ने संतु मारकण्डेय, सतीश मारकण्डेय और दीपक साहू पर डंडे और धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही जामुल पुलिस सक्रिय हो गई और फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुरानी रंजिश के कारण हमला करने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक, यह विवाद दो दिन पहले घासीदास नगर में हुई एक स्कूटी में आग लगाने की घटना से शुरू हुआ था। उस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उसी घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी पक्ष ने बदले की भावना से दोबारा विवाद शुरू किया, जिसके बाद यह मामला हिंसक झड़प में बदल गया। पीड़ित परिवार का आरोप- शाम छह बजे थाने पहुंचे थे घायल पक्ष का दावा है कि घटना से पहले ही हालात बिगड़ने लगे थे। परिवार के सदस्य शाम करीब छह बजे शिकायत लेकर जामुल थाने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि उस समय उनके साथ हुई मारपीट और विवाद की जानकारी पुलिस को दी गई थी, लेकिन शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। न तो मामला दर्ज किया गया और न ही मौके पर पुलिस भेजी गई। परिवार का कहना है कि यदि उसी समय पुलिस हस्तक्षेप कर देती तो रात में हुए हमले को रोका जा सकता था। लेकिन कथित लापरवाही के कारण आरोपी पक्ष दोबारा बड़ी संख्या में पहुंचा और जानलेवा हमला कर दिया। गर्भवती महिला के साथ मारपीट का भी आरोप पीड़ित परिवार की महिला अमर बाई ने आरोप लगाया है कि हमले के दौरान उनकी तीन माह की गर्भवती बेटी आरती साहू के पेट में भी लात मारी गई, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और रक्तस्राव शुरू हो गया। परिवार के कई सदस्य घायल हुए हैं और उनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है। अमर बाई का कहना है कि वह पहले भी कई बार थाने पहुंचकर शिकायत कर चुकी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले स्कूटी जलाने की घटना हुई, फिर विवाद बढ़ता गया, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि आरोपी पक्ष ने गाली-गलौज और मारपीट करते हुए पूरे परिवार को निशाना बनाया। एफआईआर में देरी को लेकर भी उठे सवाल पीड़ित परिवार का आरोप है कि रात में गंभीर घटना होने के बावजूद देर रात तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उनका कहना है कि पुलिस की ओर से तत्परता दिखाई जाती तो तीन लोगों को चाकू नहीं लगते और पूरा परिवार इस भयावह स्थिति से बच सकता था। घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस ने दर्ज किया मामला जामुल थाना पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 417/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त एक डंडा और एक धारदार हथियार भी जब्त किया है।
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