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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा बुधवार को घोषित 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में जशपुर जिले के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। जिले के 5 छात्रों ने राज्य की प्रावीण्य सूची (टॉप टेन) में स्थान प्राप्त कर न केवल अपने परिवार और विद्यालय, बल्कि पूरे जशपुर जिले का गौरव बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को रायपुर से ऑनलाइन माध्यम से इन परीक्षा परिणामों की घोषणा की। परिणाम जारी होते ही जिले भर के स्कूलों और विद्यार्थियों के घरों में खुशी का माहौल देखा गया। 10वीं में 93.29% और 12वीं में 93.32% विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की इस वर्ष जशपुर जिले से कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 10,850 और कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 9,580 विद्यार्थी शामिल हुए थे। जिले का कुल पास प्रतिशत सराहनीय रहा, जिसमें 10वीं में 93.29 प्रतिशत और 12वीं में 93.32 प्रतिशत विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। लड़कियों ने एक बार फिर लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। 10वीं में 69.19 प्रतिशत और 12वीं में 66.59 प्रतिशत विद्यार्थियों ने फर्स्ट डिवीजन हासिल किया। छात्राओं ने एक बार फिर लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया, 10वीं में 94.88 प्रतिशत और 12वीं में 94.70 प्रतिशत छात्राएं सफल रहीं। राज्य स्तरीय प्राविण्य सूची में जिले के कुल पांच विद्यार्थियों ने स्थान बनाकर जशपुर का नाम रोशन किया है। कक्षा 10वीं (हाईस्कूल) टॉपर्स आयुषी सिन्हा (श्री महावीर दिगंबर जैन हायर सेकेंडरी स्कूल) भूपेश यादव (स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल) कक्षा 12वीं (हायर सेकेंडरी) टॉपर्स आशा यादव (स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल) करीना सिंह (पीएम श्री स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल) आर्या पैंकरा (शासकीय गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल) टॉप 5 में जगह बनाने वाले बच्चों की तस्वीरें डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहती है आयुषी कक्षा 10वीं की मेधावी छात्रा आयुषी सिन्हा की सफलता जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। जशपुर शहर के टंकी टोली निवासी आयुषी शिक्षक परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता राजीव सिन्हा और माता स्नेहलता सिन्हा दोनों शिक्षक हैं, जबकि उनके दादा विजय सिन्हा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और वर्ष 2012 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद आयुषी के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। सफलता का श्रेय माता-पिता, दादा और विद्यालय के शिक्षकों को आयुषी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, दादा और विद्यालय के शिक्षकों को दिया। उसने बताया कि वह प्रतिदिन लगभग छह घंटे नियमित अध्ययन करती थी। आयुषी का सपना आगे चलकर नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनना है, ताकि वह गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सके।
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