नईदुनिया प्रतिनिधि, रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव के रहने वाले अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहण करने वाले एक साधारण परिवार से आने वाले अजय ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगल, जो कभी उनके परिवार की आजीविका का साधन थे, उनके कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारी का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

संघर्षों के बीच पूरी की पढ़ाई
अजय का बचपन जंगलों और ग्रामीण परिवेश के बीच बीता। उनके माता-पिता अधिक शिक्षित नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। छुट्टियों के दौरान अजय भी जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहण में परिवार की मदद करते थे।
आर्थिक अभावों के बावजूद अजय ने पढ़ाई में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने 10वीं कक्षा में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में अध्ययन के दौरान उन्हें लगातार तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई।
छात्रवृत्ति से पढाई ॉ
अजय गुप्ता ने 12वीं कक्षा में शानदार प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) रायपुर में प्रवेश प्राप्त किया। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति मिलती रही।

4 बार मेन्स तीन बार इंटरव्यू के बाद मिला मुकाम
साल 2021 में अजय ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। यह रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने चार बार मेन्स परीक्षा लिखी और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचे। हर बार मंज़िल सामने दिखती, लेकिन सफलता हाथ से फिसल जाती, लेकिन अजय ने हार नहीं मानी, क्योंकि संघर्ष उनके जीवन का हिस्सा पहले से था।
एनआईटी ने बदला सोचने का नजरिया
अजय कहते हैं कि “पहले सपने बहुत बड़े नहीं थे। लगता था कि हमारी दुनिया बस गांव तक सीमित है, लेकिन एनआईटी में प्रवेश लेने के बाद नजरिया बदल गया। पहली बार लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं।” वे आगे बताते हैं कि बचपन से ही उनका जुड़ाव जंगल से रहा है। जंगल ने उन्हें न केवल रोजगार दिया, बल्कि जीवन को एक नई दिशा भी प्रदान की। बस्तर में कार्य करने के दौरान जंगल से उनका यह रिश्ता और भी मजबूत हुआ।
अजय का कहना है कि जंगल हमेशा से उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। जंगलों ने उन्हें केवल रोजगार नहीं दिया, बल्कि जीवन की दिशा भी दी। बस्तर में काम करने के दौरान उनका जंगलों से जुड़ाव और मजबूत हुआ।
सरकारी योजनाओं से मिला सहारा
अजय की सफलता में छत्तीसगढ़ सरकार की विभिन्न योजनाओं की भी अहम भूमिका रही। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना ने उनकी पढ़ाई के दौरान आर्थिक सहायता प्रदान की। इससे उन्हें अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर पूरा ध्यान देने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के विश्वास और मेहनत की जीत है। उन्होंने कहा कि अजय ने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने भी अजय को फोन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अजय की उपलब्धि हजारों वनाश्रित परिवारों के सपनों और संघर्ष का प्रतीक है।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों में रहकर बड़ी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि कठिन मेहनत, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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