रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बोरिया तालाब से लगी 34 एकड़ जमीन की बिक्री को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। …और पढ़ें

HighLights
- बोरिया तालाब जमीन सौदे पर बढ़ा विवाद
- रिक्रिएशन पार्क योजना वर्षों से अधूरी पड़ी
- विधानसभा में उठ चुका है मामला
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा बोरिया तालाब से लगी 34 एकड़ जमीन की बिक्री अब बड़े भूमि घोटाले के रूप में चर्चा में है। आरोप है कि करीब 444 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन निजी कंपनी सीजी कृपा प्राइवेट लिमिटेड को मात्र 44 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
दावा किया जा रहा है कि जमीन की बिक्री बिना TNCP अनुमति 300 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से की गई, जबकि आसपास की व्यावसायिक जमीनों की कीमत 3000 रुपये प्रति वर्गफीट तक थी। बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर राजधानी का सबसे बड़ा रिक्रिएशन पार्क प्रस्तावित था, वहां अब निजी प्रोजेक्ट की तैयारी की जा रही है।
400 करोड़ रुपये नुकसान का आरोप
34 एकड़ जमीन का क्षेत्रफल लगभग 14.81 लाख वर्गफीट बताया गया है। यदि वर्तमान बाजार दर 3000 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से मूल्यांकन किया जाए तो जमीन की कीमत करीब 444 करोड़ रुपये बैठती है। ऐसे में इस सौदे से शासन को लगभग 400 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप लगाया जा रहा है।
रिक्रिएशन पार्क योजना ठंडे बस्ते में
वर्ष 2015 में भाजपा सरकार के दौरान बोरिया तालाब क्षेत्र में 225 एकड़ में विशाल रिक्रिएशन पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई थी। प्रस्तावित परियोजना में वाटर स्पोर्ट्स, विदेशी झूले, गार्डन, रिसार्ट, कैफेटेरिया और फैमिली एंटरटेनमेंट जोन तैयार किया जाना था। इसके लिए आरडीए ने 12 करोड़ रुपये का बजट भी तय किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह योजना रोक दी गई।
‘आमोद-प्रमोद’ जमीन के उपयोग पर विवाद
आरडीए रिकॉर्ड में यह जमीन ‘आमोद-प्रमोद’ श्रेणी में दर्ज है, जिसका उपयोग मनोरंजन, पार्क, सांस्कृतिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जाता है। आरोप है कि पहले जमीन कम कीमत पर निजी कंपनी को बेची गई और बाद में उसका लैंडयूज बदलने की तैयारी की गई।
विधानसभा में उठा मामला
रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने दो साल पहले विधानसभा में यह मामला उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि मनोरंजन पार्क के लिए सुरक्षित जमीन किस आधार पर बेची गई। अधिकारियों ने जवाब में कहा था कि जमीन ‘एम्युजमेंट पार्क’ के नाम से आरक्षित नहीं थी, जबकि रिकॉर्ड में उसका उपयोग ‘आमोद-प्रमोद’ दर्ज बताया गया।
बोरिया तालाब की 34 एकड़ आमोद-प्रमोद भूमि एक कंपनी को बेचकर उसका लैंडयूज बदलने की तैयारी की गई थी। सरकार बदलने के बाद प्रक्रिया रुक गई।
-राजेश मूणत, विधायक, रायपुर पश्चिम
यदि जमीन बिक्री या लैंडयूज प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-नंदकुमार साहू, अध्यक्ष, आरडीए
<
