छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के दोषी युवक को बड़ी राहत देते हुए उसकी फांसी की सजा को बदलकर प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास में तब्दील कर …और पढ़ें

HighLights
- विशेष अदालत ने मामले में फांसी की सजा सुनाई थी
- मृत्युदंड केवल दुर्लभतम मामलों में ही दिया जा सकता है
- सजा के समय सुधार व पुनर्वास की संभावना पर विचार जरूरी
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के दोषी युवक को बड़ी राहत देते हुए उसकी फांसी की सजा को बदलकर प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया है। विशेष अदालत ने आरोपित को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसकी पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट पहुंचा था।
आरोपित ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि मृत्युदंड केवल दुर्लभतम मामलों में ही दिया जा सकता है।
केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर मृत्युदंड नहीं दिया जा
कोर्ट के अनुसार रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपित के सुधरने की संभावना खत्म हो चुकी है या वह समाज के लिए लगातार खतरा बना रहेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। सजा तय करते समय आरोपित के सुधार और पुनर्वास की संभावना पर भी विचार जरूरी है।
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यह था पूरा मामला
मामला सक्ती जिले के डभरा थाना क्षेत्र का है। पीड़िता बेमेतरा जिले के परिवार न्यायालय में प्यून के पद पर कार्यरत थी। अगस्त 2022 में वह छुट्टी पर अपने गांव आई हुई थी। 14 अगस्त को वह घर से बेमेतरा जाने की बात कहकर स्कूटी से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। अगले दिन स्वजन ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को महिला के परिचित युवक पर शक हुआ।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों से पता चला कि आरोपित महिला को अपनी स्कूटी पर सुनसान पालगड़ा घाटी की ओर ले गया था और कुछ देर बाद अकेले लौट आया।
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