नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: प्रेम और विश्वास की एक अनोखी कहानी सोमवार को बिलासपुर कलेक्टोरेट में देखने को मिली। तखतपुर के प्रेमी युगल सतीश साहू और दीपिका साहू ने 14 दिनों के भीतर दो बार सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को नया मुकाम दिया।

पहले गांव के मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाज से विवाह हुआ और फिर तय तारीख पर एडीएम कोर्ट पहुंचकर दोनों ने कानूनी रूप से शादी की। कोर्ट मैरिज में पहुंचे रिश्तेदारों और बरातियों की भीड़ ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चौंका दिया।
वर्षों पुराने प्रेम संबंध को परिवारों की मिली सहमति
तखतपुर के ग्राम सिलतरा निवासी सतीश साहू रोल की दुकान संचालित करते हैं। उनका ग्राम गनियारी निवासी दीपिका साहू के साथ कई वर्षों से प्रेम संबंध था। दोनों ने अपने रिश्ते को विवाह में बदलने का निर्णय लिया और इसकी जानकारी अपने परिवारों को दी। राहत की बात यह रही कि दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए सहमत हो गए और शादी की तैयारियां शुरू कर दी गईं।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए करीब 45 दिन पहले एडीएम कोर्ट में आवेदन जमा कराया गया था। कोर्ट मैरिज के लिए 11 मई 2026 की तारीख तय हुई थी। परिवार वाले इसी दिन विवाह की औपचारिकता पूरी करने की तैयारी में थे।
बड़ी बहन की शादी ने बदला विवाह का कार्यक्रम
इसी दौरान दीपिका की बड़ी बहन नंदनी की शादी 28 अप्रैल को तय हो गई। शुरुआत में परिवार ने दोनों बहनों की शादी एक साथ कराने का विचार बनाया, लेकिन व्यवस्थाओं और तैयारियों के कारण यह संभव नहीं हो पाया। ऐसे में दीपिका ने शुभ मुहूर्त का सम्मान करते हुए बड़ी बहन की शादी वाले दिन ही विवाह करने का निर्णय लिया।
आनन-फानन में सतीश और उनके परिवार को बुलाया गया। गांव के एक मंदिर में 28 अप्रैल 2026 को दोनों का पारंपरिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न कराया गया। इस तरह दोनों पहली बार सात फेरों के बंधन में बंधे।
कोर्ट मैरिज में उमड़ी अनोखी बरात
चूंकि कोर्ट मैरिज की तारीख पहले से तय थी, इसलिए 11 मई को सतीश और दीपिका दोबारा विवाह की औपचारिकता पूरी करने कलेक्टोरेट पहुंचे। आमतौर पर कोर्ट मैरिज में सीमित लोग शामिल होते हैं, लेकिन यहां एडीएम एसएस दुबे के न्यायालय के बाहर करीब 40 लोगों की भीड़ मौजूद थी। रिश्तेदार और परिचित बरातियों की तरह सज-धजकर पहुंचे थे। इतनी भीड़ देखकर एडीएम एसएस दुबे भी हैरान रह गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “यह कोर्ट मैरिज है या अरेंज मैरिज?” जब परिवार वालों ने मंदिर विवाह और दूसरी शादी की पूरी कहानी सुनाई तो वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी मुस्कुरा उठे।
पूरे कलेक्टोरेट में दिनभर होती रही चर्चा
सुबह 11 बजे से ही एडीएम कोर्ट के बाहर काफी गहमागहमी रही। शुरुआत में कलेक्टोरेट पहुंचे लोगों को लगा कि किसी बड़े राजस्व प्रकरण की सुनवाई या उपचुनाव नामांकन से जुड़ी गतिविधि चल रही है। लेकिन जब लोगों की नजर दूल्हा-दुल्हन पर पड़ी तो मामला साफ हो गया।
करीब चार घंटे तक कलेक्टोरेट के गलियारों में इस अनोखी शादी और प्रेमी जोड़े की कहानी चर्चा का विषय बनी रही। विवाह की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार वालों ने परिसर में जमकर फोटो खिंचवाई और खुशी का इजहार किया।
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