सक्ती जिले के डभरा स्थित वेदांता पावर प्लांट सिंघीतराई में हुई भीषण त्रासदी की जांच के लिए राज्य शासन ने संभागायुक्त सुनील जैन को जांच अधिकारी नियुक्त …और पढ़ें

HighLights
- 29 अप्रैल को साक्ष्य प्रस्तुत करने जुटेंगे लोग
- मामले में प्रबंधन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
- हादसे में अब तक 24 श्रमिक गंवा चुके हैं जान
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सक्ती जिले के डभरा स्थित वेदांता पावर प्लांट सिंघीतराई में हुई भीषण त्रासदी की जांच के लिए राज्य शासन ने संभागायुक्त सुनील जैन को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्होंने 29 अप्रैल को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। इस दौरान प्रत्यक्षदर्शी गवाह व पीड़ित प्लांट की तकनीकी खामियों और प्रबंधन की चूक को लेकर बयान दर्ज कराएंगे। इधर हादसे से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
4 अप्रैल की दोपहर चीख-पुकार मची थी
वेदांता पावर लिमिटेड के सिंघीतराई प्लांट में 14 अप्रैल की दोपहर जो चीख-पुकार मची थी, उसकी गूंज अब प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दे रही है। बायलर यूनिट-1 की स्टीम पाइप लाइन फटने से हुए हादसे ने अब तक 22 हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। कुल 34 पीड़ितों में से 24 की मौत हो चुकी है। वहीं 10 श्रमिक जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि क्या यह महज तकनीकी खराबी थी या जानबूझकर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई।
संभागायुक्त सुनील जैन ने खुद कमान संभाली
हकीकत जानने के लिए संभागायुक्त सुनील जैन ने खुद कमान संभाली है। 29 अप्रैल को सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय के सभाकक्ष में गवाहों और सबूतों के साथ पीड़ितों को मौजूद रहने कहा गया है। सुनवाई में न केवल पीड़ित और उनके स्वजन, बल्कि घटना के चश्मदीद भी अपना पक्ष रख सकते हैं। सुनवाई इसलिए भी अहम है क्योंकि 24 मौतों के बाद अब प्लांट के मेंटेनेंस और सुरक्षा ऑडिट पर उठ रहे सवालों का जवाब प्रबंधन को देना होगा। जांच अधिकारी ने कहा है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर छोटे-बड़े तथ्य की बारीकी से जांच की जाएगी।
24 श्रमिकों की मौत का जिम्मेदार कौन
हादसे के बाद से अब तक गरम भाप और पानी की चपेट में आकर झुलसने वालों में से 24 श्रमिकों की जान जा चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही थी, क्या प्रबंधन को इस बड़े खतरे का अंदेशा पहले से था। 29 अप्रैल की सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि श्रमिकों की जान से खिलवाड़ करने वाला असली गुनाहगार कौन है।
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