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दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र में महिला की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चरित्र शंका के चलते महिला का गला घोंटकर हत्या करने वाले आरोपी दुर्गा प्रसाद मारकण्डेय उर्फ दुर्गा को उम्रकैद और जुर्माने से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतका वेदमती वर्मा जामुल के शिवपुरी इलाके में किराये के मकान में अकेली रहती थी। 23 अगस्त 2023 की शाम परिजनों को सूचना मिली कि वेदमती अपने कमरे में मृत अवस्था में पड़ी है। सूचना मिलने पर मृतका का भाई मनहरण लाल वर्मा मौके पर पहुंचा। कमरे में पहुंचने पर देखा गया कि महिला के गले में प्लास्टिक की रस्सी बंधी हुई थी। चेहरा काला पड़ चुका था और नाक-कान से खून निकल रहा था। इसके बाद जामुल पुलिस को सूचना दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सुपेला अस्पताल भेजा। डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि मृतका के गले पर गहरे फंदे के निशान थे। शरीर पर संघर्ष के भी संकेत मिले, जिनमें गाल, भुजा और कंधे पर नाखून के निशान शामिल थे। डॉक्टरों ने अदालत में बताया कि महिला की मौत दम घुटने और कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट के कारण हुई। रिपोर्ट में मौत को ‘होमीसाइडल’ यानी हत्या बताया गया। पड़ोसियों और परिजनों के बयान बने अहम सबूत मामले में पड़ोसियों और परिजनों के बयान भी अहम साबित हुए। पड़ोस में रहने वाली लक्ष्मी यादव ने बताया कि काफी देर तक आवाज लगाने के बाद भी जब वेदमती ने दरवाजा नहीं खोला, तब लोगों को शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। मृतका के भाई मनहरण लाल वर्मा ने अदालत को बताया कि घटना वाली रात आरोपी दुर्गा प्रसाद को मृतका के साथ देखा गया था। पूछताछ में आरोपी ने कबूला जुर्म जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी दुर्गा प्रसाद मारकण्डेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह 22 अगस्त 2023 की रात शराब के नशे में वेदमती के घर गया था। उसने स्वीकार किया कि चरित्र पर शक होने के कारण उसने प्लास्टिक की रस्सी से महिला का गला घोंट दिया। हत्या के बाद आरोपी ने मृतका के कानों से सोने के टॉप्स और पैरों से चांदी का लच्छा भी निकाल लिया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने जेवर बरामद कर लिए। अदालत ने इसे अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण सबूत माना। अदालत ने कहा- नरमी की गुंजाइश नहीं न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट, आरोपी की मौजूदगी, मेमोरेण्डम कथन और जेवरों की बरामदगी जैसी सबूत आरोपी के अपराध को साबित करती है। अदालत ने माना कि आरोपी ने चरित्र शंका के चलते महिला की निर्मम हत्या की, इसलिए उसके प्रति नरमी बरतना उचित नहीं होगा। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
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