भास्कर न्यूज | मुड़ागांव(कोरासी) ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी मंच है। पेसा कानून एवं छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के अनुसार वर्ष में कम से कम 4 बार तथा पेसा क्षेत्र में 6 बार ग्राम सभा का आयोजन अनिवार्य है। इसके बावजूद कई पंचायतों में ग्राम सभाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। अध्यक्ष उप सरपंच संघ छुरा रूपनाथ बंजारे ने आरोप लगाया है कि अधिकांश पंचायतों में सचिवों द्वारा ग्राम सभा की सूचना समय पर और विधिवत नहीं दी जाती। नियमानुसार एक सप्ताह पहले सूचना देना आवश्यक है, परंतु वास्तविकता में एक दिन पहले फोन के माध्यम से जानकारी दी जाती है, जिससे कोरम पूरा नहीं हो पाता और बैठक निरस्त हो जाती है। उन्होंने बताया कि लोगों में जागरूकता की कमी, समय पर सूचना का अभाव, मजदूर वर्ग के लिए अनुपयुक्त समय, महिलाओं की कम भागीदारी, प्रशासनिक लापरवाही एवं सचिवों की मनमानी के कारण ग्राम सभा में उपस्थिति कम रहती है। वहीं इस लापरवाही की वजह से योजनाओं में धांधली हो रही है और अपात्र लोगों को लाभ िमल रहा है। ग्राम निधि का दुरुपयोग िकया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 1/5 मतदाता या 50 लोग लिखित मांग करें, तो विशेष ग्राम सभा बुलाना अनिवार्य है, अन्यथा एसडीएम कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह सचिवों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और ग्राम सभा को मजबूत बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।
<
