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राजधानी में शहरी और ग्रामीण इलाकों में 500 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर कब्जा हो चुका है। हैरानी की बात ये है कि अभी तक इन मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। प्रकरण की जांच के नाम पर एक से दो साल से सभी मामले लंबित है। मामलों की सुनवाई पूरी नहीं होने की वजह से जमीनों से न तो अवैध कब्जे हटे हैं और न ही वहां कोई नया निर्माण हो पाया है। यही वजह है कि कलेक्टर ने ऐसे सभी मामलों में सख्ती शुरू कर दी है। सभी तहसीलों के अफसरों से साफ कहा गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के जो मामले हैं उनकी सुनवाई तुरंत पूरी की जाएगी। इनके अलावा जिन मामलों की सुनवाई पूरी हो गई है वहां की जमीनों से अवैध कब्जे हटा दिए जाए। जांच रिपोर्ट बनाने में लापरवाही बरतने या रिपोर्ट पूरी होने के बाद कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अफसरों को पद से निलंबित करने की भी अनुशंसा की जाएगी। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार चंगोराभाठा, सेरीखेड़ी, गोगांव, सेजबहार, मंदिरहसौद, धरसींवा, फरहदा और नवा रायपुर के कई गांवों की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हो गए हैं। सरकारी रिकार्ड में ये जमीन चारागाह, खेल मैदान, तालाब, मुक्तिधाम सहित अन्य कामों के लिए आरक्षित किए गए थे। लेकिन शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी कर इन जमीनों पर प्लाटिंग करने के साथ ही अवैध कब्जा कर दूसरे निर्माण भी कर लिए गए हैं। इसलिए अब इन जमीनों का नए सिरे से सीमांकन करने के आदेश दिए गए हैं। फरहदा में 300 एकड़ सरकारी जमीन का सीमांकन
जिले के खरोरा तहसील में मौजूद फरहदा गांव में 300 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर कई लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इस पर गांव वालों का विरोध लगातार जारी है। इसकी शिकायत पिछले साल गांव के ही सरपंच ने संजय साहू ने अफसरों से की थी। उनका कहना है कि अवैध कब्जे की वजह से गांव में शव दफनाने के लिए तक जगह नहीं बची है। लोगों को तालाब पार शवों को दफनाना पड़ रहा है। गांव की पूरी जमीन शासकीय है। दस्तावेजों में इसका प्रमाण भी है। इसके बावजूद अफसर अभी तक इस पर सख्ती से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जमीन सरकारी तो नहीं, इसका पता ऐसे करें
किसी भी वार्ड, मोहल्ले या गांव में जमीन सरकारी है इसका पता आसानी से लगाया जा सकता है। रायपुर समेत राज्यभर में 90 फीसदी तक जमीन के रिकार्ड ऑनलाइन हो चुके हैं। इसके लिए जिला या राज्य की अधिकृत वेबसाइट का उपयोग करें। भुईंयां एप या वेबसाइट में खसरा नंबर डालकर खातेदार का नाम चेक कर सकते हैं। इस बॉक्स में मालिक के नाम की जगह ‘शासन’, ‘नगर निगम/पालिका’, ‘ग्राम सभा/पंचायत’ या “नजूल” लिखा है तो वह सरकारी जमीन है। इसके अलावा बी-वन के कॉलम में किसी व्यक्ति का नाम नहीं है और वहां ‘घास भूमि’, ‘चरागाह’, ‘बंजर’, ‘आबादी’ या ‘रास्ता’ दर्ज है तो वह सार्वजनिक या सरकारी जमीन ही मानी जाती है। जमीन के मामले सालों से लंबित भाठागांव में करीब 63 एकड़ चारागाह की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा की जांच करीब दो साल से लंबित है। अब तक इस जमीन पर एसडीएम ने अंतिम फैसला नहीं दिया है। इस वजह से जमीन की स्थिति जस की तस है। राजधानी से लगे फरहदा गांव में करीब 300 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत कलेक्टर के पास पहुंची थी। इस मामले में जांच के आदेश भी दिए गए। लेकिन अभी तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अवैध कब्जा भी नहीं हटाया गया है। मंदिर हसौद के कुछ गांवों में करीब 70 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया था। इन सरकारी जमीनों पर सामुदायिक भवन और निर्माण होने थे। लेकिन अभी तक मामलों की सुनवाई पूरी नहीं हुई है। कई जगहों से अवैध कब्जे भी नहीं हटाए गए हैं। फरहदा में सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत पर वहां पूरी जमीन का सीमांकन कराया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। भाठागांव जमीन का मामला रायपुर एसडीएम कोर्ट में है। इसके अलावा जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिली है संबंधित अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई है। लंबित मामलों का भी तुरंत निराकरण करने कहा गया है। -कीर्तिमान सिंह राठौर, अपर कलेक्टर राजस्व
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