![]()
खैरागढ़ जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब जिला प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मुकुल साव ने फीस वृद्धि और निजी किताबों के कारोबार पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद की गई है। जारी आदेश के मुताबिक जिले के सभी निजी स्कूलों को छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय अधिनियम के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। बिना उचित कारण फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। 8% से ज्यादा फीस बढ़ाई तो देना होगा पूरा हिसाब प्रशासन ने साफ किया है कि जो स्कूल 8 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि करेंगे, उन्हें इसका पूरा ब्योरा देना होगा। इसमें फीस बढ़ाने का आधार, संबंधित बैठक की जानकारी और मंजूरी का रिकॉर्ड शामिल रहेगा। फीस समिति पर भी रहेगी सख्त निगरानी अब स्कूलों की फीस समिति में नोडल प्राचार्य की भूमिका सिर्फ नाम मात्र की नहीं रहेगी। उन्हें फीस संबंधी फैसलों की निगरानी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी नियमों का पालन हो। कक्षा 1 से 8 तक सिर्फ NCERT किताबें डीईओ ने निजी किताब सिंडिकेट पर भी बड़ा वार किया है। आदेश के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को सिर्फ NCERT की किताबों से पढ़ाया जाएगा। किसी निजी प्रकाशन की किताब थोपना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। 9वीं से 12वीं तक भी नहीं चलेगी जबरदस्ती कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को भी किसी खास दुकान या प्रकाशन से किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। इससे अभिभावकों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा। शिकायतों पर होगी तुरंत कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसके लिए पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिभावकों की शिकायतें सीधे प्रशासन तक पहुंचें और उन पर तत्काल कार्रवाई हो सके। नियम तोड़ने वालों पर कड़ा एक्शन डीईओ मुकुल साव ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को राहत, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता इस फैसले को शिक्षा के व्यवसायीकरण पर बड़ी चोट माना जा रहा है। यदि आदेश सख्ती से लागू हुए, तो अभिभावकों को राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
<
