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छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के करीव 560 क्लस्टर तकनीशियनों को सेवा से बाहर कर दिया गया है। यह फैसला 1 अप्रैल से लागू हुआ है, जिससे सालों से सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रहे इन तकनीशियनों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कोंडागांव जिले के 17 कर्मचारी भी इससे प्रभावित हुए हैं। तकनीशियनों के अनुसार उन्होंने पिछले 10 से 12 सालों तक विषम परिस्थितियों में सौर ऊर्जा संयंत्रों, सोलर ड्यूल पंप और “सौर सुजला योजना” जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सेवाएं दीं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यमुक्त कर दिया गया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मार्च तक का वेतन भी जारी नहीं किया गया। विभाग ने “फंड की कमी” का हवाला देते हुए भुगतान रोक दिया है।
फिर से बहाल करने की मांग इससे प्रभावित तकनीशियनों के सामने दैनिक खर्चों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। इन तकनीशियनों को हटाने से राज्य की कई महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। प्रभावित कर्मचारियों ने सरकार से मार्च तक का बकाया वेतन तत्काल जारी करने और उनके अनुभव के आधार पर सेवा में फिर से बहाली की मांग की है। अनुबंध अवधि पूरी होने पर सेवा समाप्त जिला क्रेडा प्रभारी सविता कश्यप ने बताया कि इन कर्मचारियों को रुचि की व्यक्ति (अनुबंध) के तहत 31 मार्च तक ही कार्य पर रखा गया था। यह समय अवधि पूर्ण होने के कारण उनकी सेवा स्वतः समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि शासन से आगे जो भी आदेश प्राप्त होगा, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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