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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर लोग यह टिप्पणी करने लगते हैं कि सीधा सरल स्वभाव है। इस कारण सरकार के कामकाज पर भी उनके इस स्वभाव का असर होने लगा है। इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर ने उनसे सीधा सवाल किया कि आपका सरल स्वभाव क्या सरकार को कमजोर कर रहा है। इस पर उनका सीधा जवाब था- आदमी का स्वभाव अलग होता है और कामकाज अलग, देखना यह चाहिए कि सरकार काम क्या कर रही है और क्या फैसले कर रही है। व्यक्ति से नहीं उसके काम से उसका आंकलन होना चाहिए। साय ने भास्कर के तमाम सवालों के जवाब दिए। यहां प्रस्तुत हैं संपादित अंश… क्या आपका सरल स्वभाव सरकार को कमजोर कर रहा है?
साय- ऐसा बोलना गलत होगा। आदमी का स्वभाव उसके व्यवहार पर लागू होता है। कामकाज पर उसकी इच्छाशक्ति का प्रभाव होता है। सरकार चलाने के लिए फैसले लेने होते हैं। और हमारी सरकार आवश्यकतानुसार कड़े फैसले ले रही है। इसका उदाहरण बता सकते हैं?
-जब जैसी जरूरत पड़ती है, उसके अनुरूप फैसले लिए जा रहे हैं। अब देखिए जल्द ही राज्य में आपको सीएम हेल्पलाइन की सुविधा नजर आएगी। 24 घंटे सातों दिन यह सेवा चालू रहेगी। राज्य का कोई भी व्यक्ति हेल्पलाइन के नंबर पर अपनी शिकायत-समस्या बता सकता है। अफसरों को उस पर तय समय सीमा में काम करना होगा। जो अफसर इसमें लापरवाही करेगा, उस पर सीधी कार्रवाई होगी। इसमें अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसा कहा जाता है कि अफसरशाही हावी होती जा रही है?
-यह बिल्कुल गलत है। सबका अपना काम होता है। अफसर सिस्टम का हिस्सा होते हैं और उनकी जो जवाबदारी होती है, उसको वे पूरा करते हैं। सबका काम बंटा हुआ है। सरकार का काम फैसले लेना है और अफसर उस पर अमल करते हैं। नक्सलवाद खत्म होने के बाद ऐसा क्या करेंगे कि दोबारा नक्सलवाद ना पनपे?
-नक्सलवाद की वजह से बस्तर का विकास रुका रहा। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के विकास का काम प्रारंभ हो चुका है। बस्तर-2 के नाम से पूरा रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत बस्तर को देश-दुनिया के समानांतर खड़ा करेंगे। यही एकमात्र उपाय है। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने जा रहे हैं? प्रारूप कैसा होगा?
-भाजपा की सोच स्पष्ट है। हमारी प्रतिबद्धता रही है कि देश में हर नागरिक के लिए समान कानून हो। देश तुष्टिकरण से नहीं बल्कि समान कानून के दायरे में चलाया जाए। इसमें हम इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे कि आदिवासियों की पहचान और संस्कृति पर समान नागरिक संहिता का असर ना हो। इसके दायरे में क्या बदलाव आएंगे?
– वर्तमान में विवाद, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। इन पर असमानता दूर की जाएगी। धर्मांतरण बड़ा विवादित मामला है। सरकार के कानून का कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। इस पर सरकार का रुख क्या होगा?
– धर्मांतरण में लिप्त लोगों ने जनजातीय समुदाय को भारतीय समाज से अलग करने का षड्यंत्र किया है। हमने जो कानून बनाया है उसमें कोई भी व्यक्ति प्रलोभन या दबाव से मतांतरण नहीं कर पाएगा। इसे रोकने के लिए राज्य ने जो नया कानून बनाया है, उस पर सख्ती से अमल होगा। एक प्रक्रिया है जिसका पालन करना होगा। अन्यथा वह कानून का सामना करेगा। खासकर महिला, नाबालिग, ओबीसी और एसटी-एसी मामलों में 20 वर्ष तक सजा का प्रावधान किया गया है। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले यह सजा और भी सख्त रखी गई है। भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार ने छत्तीसगढ़ की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसको कैसे रोकेंगे?
-पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया था। अब ऐसा नहीं होगा। इसको रोकने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल बनाया जा रहा है। सालभर की भर्ती का कैलेंडर बनाया जाएगा। समान योग्यता वाले पदों की भर्ती एक ही परीक्षा के माध्यम से होगी। भर्ती नियमित रूप से होगी ताकि युवाओं का भरोसा बना रहे। भर्ती परीक्षाओं में नकल के प्रकरण बढ़ रहे हैं?
-अब परीक्षाओं में धांधली करने वाले कितने भी बड़े और रसूखदार क्यों न हो, उन पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। व्यावसायिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए विधेयक भी पारित किया गया है। राज्य की औद्योगिक नीति क्या वर्तमान परिदृश्य में सही है?
-हमारी नई औद्योगिक नीति में कोर इंडस्ट्री के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। इसके साथ ही नए जमाने में आ रहे बदलाव को ध्यान में रखते हुए नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क बनाया गया है। प्रदेश की पहली सेमी कंडक्टर यूनिट तैयार हो रही है। नए औद्योगिक कारीडोर और इंडस्ट्रियल पार्क के निजी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने का उपक्रम किया है। सिंगल विंडो से राज्य में निवेश आसान हो गया है। सुशासन तिहार से क्या बदलाव आ पाएगा?
-देखिए, सबसे पहली बात सुशासन तिहार का मतलब है आम जनता तक सरकार और प्रशासन का पहुंचना। इस दौरान मैं खुद आम आदमी के बीच जाकर उनकी समस्याएं जानूंगा। मेरे साथ मंत्रिमंडल के साथी और प्रशासन का पूरा अमला फील्ड पर होगा। ग्रामीणों से मिलने का मई-जून सबसे अच्छा समय होता है। नागरिक सेवाएं पारदर्शी तरीके से लोगों को मिल रही हैं या नहीं, लोगों को कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है, यह देखना हमारा और हमारी सरकार का काम होगा। इसमें लापरवाह अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। जिनके कामकाज में लापरवाही और अन्य खामियां मिलीं तो आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर प्रणाली आधे रायपुर में क्यों लागू की गई है? मंत्रालय, नवा रायपुर, एयरपोर्ट अभी कमिश्नरी के दायरे में नहीं हैं? क्या यह पूरे रायपुर शहर में लागू होगी? साय- रायपुर और बिरगांव नगर निगम को शामिल करते हुए प्रारंभिक निर्णय लिया गया है। इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। सरकार इस मामले में स्पष्ट सोच के साथ काम कर रही है। अगर कमिश्नरी का दायरा बढ़ाना जरूरी होगा, सरकार इसमें संकोच नहीं करेगी। अच्छे परिणामों के आधार पर कमिश्नरी का दायरा बढ़ाया जाएगा।
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