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कोरबा के सीतामढ़ी स्थित श्रीराम गुफा मंदिर में 15वीं से 19वीं शताब्दी की 14 अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां मिली हैं। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत इनका डिजिटल संरक्षण किया गया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन इस महत्वाकांक्षी अभियान को क्रियान्वित कर रहा है। इसका उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए उन्हें सुरक्षित रखना है। पहले देखिए तस्वीरें सीतामढ़ी में सर्वे के दौरान मिलीं 14 ऐतिहासिक पांडुलिपियां जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह के नेतृत्व में ‘ज्ञानभारतम दूत’ युवा टीम कोरबा ने श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में विस्तृत सर्वेक्षण किया। यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसी सर्वेक्षण के दौरान ये 14 दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। मंदिर के पुजारी दुकालू श्रीवास ने बताया कि उन्होंने इन पांडुलिपियों को वर्षों से सहेज कर रखा था। ये उन्हें अपने पिता मातादीन श्रीवास से मिली थीं, जिन्हें उनके पूर्वजों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखा था। पांडुलिपियों में ओड़िया भाषा का प्रयोग अध्ययन से पता चला है कि इन पांडुलिपियों में ओड़िया भाषा का प्रयोग किया गया है। इनकी लिपि के गोलाकार अक्षरों को ‘मुंडिया’ कहा जाता है। प्राचीन काल में ताड़पत्रों पर लेखन के दौरान उनकी संरचना को बचाने के लिए गोलाकार अक्षरों का विकास हुआ था। इनका कालखंड 15वीं से 19वीं शताब्दी के मध्य का माना जा रहा है, और दोनों पक्षों पर लेखन अंकित है। जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने पुजारी दुकालू श्रीवास को मोमेंटो, शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। युवा टीम ने इन पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण कर उन्हें ‘ज्ञानभारतम ऐप’ पर अपलोड किया है। इस अवसर पर कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर, डॉ. सुशीला कुजूर, विकास पांडे सहित युवा टीम के शिवराज थवाईत, मानुप्रताप श्रीवास, राज कुरी और खुशबू दिनकर उपस्थित रहे।
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