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बिलासपुर में छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय एक बार फिर विवादों में आ गया है। प्रस्तावित स्टील और पावर प्लांट परियोजना के लिए तैयार पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट पर भ्रामक जानकारी देने के आरोप लगे हैं। इस मामले में अधिवक्ता संदीप तिवारी और वाइल्ड लाइफ फोटो जर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने आपत्ति दर्ज कराई है। इसके बाद वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर जांच के निर्देश दिए हैं। जलाशय 161 पक्षी प्रजातियों का आवास,58 प्रवासी प्रजातियां शामिल तिवारी का कहना है कि EIA रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि परियोजना स्थल के 10 किमी दायरे में कोई वन्यजीव प्रवासी मार्ग नहीं है, जबकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 2(36) के अनुसार, पक्षी भी वन्यजीव की श्रेणी में आते हैं। सत्यप्रकाश पांडेय के अनुसार कोपरा जलाशय 161 पक्षी प्रजातियों का महत्वपूर्ण आवास है, जिनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। ये पक्षी हर साल सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के जरिए यहां पहुंचते हैं। इनमें कई दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियां भी शामिल हैं। यह मार्ग पक्षियों के भोजन, विश्राम और जीवित रहने के लिए कोपरा जलाशय जैसी महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय प्रवासी मार्ग की अनदेखी से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है। EIA रिपोर्ट निरस्त करने की मांग आपत्तिकर्ताओं ने मांग की है कि अधूरी और भ्रामक जानकारी के आधार पर तैयार रिपोर्ट को निरस्त कर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। साथ ही जांच वेटलैंड अथॉरिटी स्तर पर ही करने की बात कही गई है। कलेक्टर ने मांगी रिपोर्ट कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि मामले में डीएफओ नीरज कुमार से रिपोर्ट मांगी गई है। जांच कमेटी में सिंचाई विभाग और विशेषज्ञ भी शामिल किए गए हैं। विकास बनाम पर्यावरण पर बहस तेज इस विवाद ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील रामसर साइट पर किसी भी परियोजना से पहले गहन अध्ययन जरूरी है, वरना प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है। स्थानीयों में भी आक्रोश जलाशय के पास उद्योग स्थापित करने की योजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पक्षी प्रेमियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी के लिए जाना जाता है, जिसे नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
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