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कांकेर जिले के हार्वेस्टर मालिकों की समस्याओं को देखते हुए महानदी हार्वेस्टर संघ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संघ ने अब जिले में बाहर से आने वाले हार्वेस्टरों के काम करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला स्थानीय हार्वेस्टर मालिकों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। संघ के अनुसार बाहर के हार्वेस्टर कम दरों पर काम करते हैं, जिससे स्थानीय मालिकों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाता। इसके परिणामस्वरूप उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और समय पर किस्तों का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति से स्थानीय हार्वेस्टर मालिकों को काफी नुकसान हो रहा था। इन समस्याओं के समाधान के लिए महानदी हार्वेस्टर संघ कांकेर ने अपना पंजीकरण करवाया है। संघ अब कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम करेगा, जिसका उद्देश्य स्थानीय हार्वेस्टर उद्योग को मजबूत करना है। बाहरी हार्वेस्टरों पर रोक और दर तय संघ के मुख्य उद्देश्यों में धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद और रायपुर जैसे अन्य जिलों से आने वाले हार्वेस्टरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना शामिल है। इसके अलावा, धान कटाई का न्यूनतम मूल्य 3000 रुपये से अधिक और अधिकतम 3500 रुपए निर्धारित किया गया है। डिफॉल्टर किसानों की सूची और ऑपरेटर नियम संघ डिफॉल्टर किसानों की पहचान कर उनकी सूची बनाएगा और हार्वेस्टर मालिकों के रुके हुए पैसे दिलवाने में मदद करेगा। हार्वेस्टर ऑपरेटरों के लिए भी एक निश्चित दर तय की जाएगी। यदि कोई ऑपरेटर बिना बताए काम छोड़कर जाता है, तो उसे कांकेर जिले में दोबारा काम नहीं दिया जाएगा। डीलर और अन्य समस्याओं पर संघ का समर्थन महानदी हार्वेस्टर संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई हार्वेस्टर डीलर मशीन बेचने के बाद सही सेवा नहीं देता या किसी प्रकार की मानसिक परेशानी देता है, तो संघ हमेशा मालिकों के साथ खड़ा रहेगा। हार्वेस्टर से संबंधित किसी भी अन्य परेशानी में संघ मालिकों के लिए लड़ाई लड़ेगा।
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