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कभी जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उन नन्हें हाथों में बंदूक थमा दी गई। स्कूल यूनिफॉर्म की जगह काली वर्दी, और कक्षा की जगह घने जंगल उनकी दुनिया बन गए। 10-12 साल की उम्र में ही उन्हें लोकतंत्र नहीं, बल्कि जनताना सरकार का कानून सिखाया गया, जहां अदालत भी उनकी, फैसला भी उनका और सजा भी उनकी। सालों तक जंगल-जंगल हथियार लेकर घूमते रहे, हिंसा दिल-दिमाग में बस गई। लेकिन, अब कहानी बदल रही है। सरेंडर कर चुके नक्सलियों के मेंटल ट्रांसफॉर्मेशन पर काम किया जा रहा है। नारायणपुर में नितारा प्रोग्राम के तहत नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के सहयोग से पुनर्वासित लोगों को कानून व्यवस्था के बारे में समझाया जा रहा है। अब काली वर्दी की जगह सफेद कुर्ता है। थिएटर के जरिए वे मॉक पार्लियामेंट और ग्रामसभा जैसी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। अपने अधिकारों, संविधान और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझ रहे हैं। ट्रेनिंग में वे खुद MLA, मंत्री बन रहे, जनता के मुद्दों को उठा रहे हैं। अब तक 295 लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो गई है। फिलहाल, 134 लोगों की ट्रेनिंग चल रही है। पहले देखिए ये तस्वीरें- कुछ ऐसी रही इनकी जिंदगी, बचपन छिना, बंदूक थमाई
इन सरेंडर नक्सलियों में से कई ऐसे हैं, जिन्हें 10-12 साल की उम्र में ही नक्सलियों ने अपने साथ ले लिया। उस उम्र में जब बच्चे खेलते हैं, पढ़ते हैं, सपने देखते हैं, इन्हें सिखाया गया लड़ना, मरना और मारना। किताबों की जगह हथियार, स्कूल की जगह जंगल, और शिक्षक की जगह कमांडर, यही इनकी दुनिया बन गई। धीरे-धीरे इनका मन और मस्तिष्क पूरी तरह माओवादी विचारधारा में ढल गया। हिंसा इनके लिए सामान्य हो गई, और सिस्टम के खिलाफ लड़ाई ही जीवन का मकसद था। खतरनाक अतीत, लाखों के इनामी और बड़े हमलों में शामिल सरेंडर करने वालों में कई ऐसे फाइटर नक्सली शामिल हैं, जिन पर 8 से 10 लाख रुपए तक का इनाम घोषित था। इनमें कुछ नक्सली मदनवाड़ा हमले में भी शामिल रहे हैं। जिसमें SP सहित कई जवान शहीद हुए थे। इनकी पहचान सिर्फ संगठन के सदस्य की नहीं थी, ये नक्सल ऑपरेशन के अहम हिस्से थे। लोकतंत्र, संविधान और अधिकार जैसी बातें इनके लिए अनजानी थी। जानिए सरेंडर नक्सली क्या कहते हैं 1. मेरा नाम रतन मरकाम है। बीजापुर जिले के पल्लेवाया गांव का रहने वाला हूं। बचपन में ही नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। उन्हीं की जनताना स्कूल में पढ़ाई किया। सरेंडर से पहले तक CYPCM था। सरकार ने मुझपर 10 लाख रुपए का इनाम रखा था। कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा। जवानों पर हमला करने की वारदात में भी था। लेकिन अब सरेंडर कर दिया हूं। एक एरिया कमेटी में मैं बड़े पद पर था। अब यहां हमें संविधान के बारे में सिखाया जा रहा है। 2. मेरा नाम दिवाकर गावड़े है। मैं कांकेर जिले का रहने वाला हूं। करीब 25 सालों तक नक्सल संगठन के साथ जुड़ा रहा। मैं DVCM कैडर का हूं। मुझपर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। मदनवाड़ा में पुलिस जवानों पर हमला करने की घटना में शामिल था। जिसमें SP समेत 29 जवानों की हत्या किए थे। मेरे साथ करीब 200 से ज्यादा नक्सली थे। मैं AK-47 हथियार चलाता था। लेकिन अब हथियार डाल दिया हूं।
सरेंडर के बाद दूसरा स्टेप- मानसिक रूप से मुख्यधारा में लाना नारायणपुर छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा जिला है, जहां सरेंडर कर चुके नक्सलियों को भारतीय संविधान की शिक्षा दी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है देश कैसे चलता है? कानून क्या होता है? अधिकार और कर्तव्य क्या हैं? हर दिन वंदे मातरम और देशभक्ति गीत गाकर इनके भीतर नई सोच जगाने की कोशिश हो रही है। उनके मन से मारने और मरने की सोच को खत्म करना असल चुनौती है। गांव लौटने से पहले इन्हें पूरी तरह से समाज के बीच रहने के लिए ट्रेंड किया जा रहा है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अब सिर्फ ऑपरेशन नहीं, बल्कि मेंटल ट्रांसफॉर्मेशन पर काम कर रही हैं। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन से सीधी बात सवाल – सरेंडर्ड नक्सली ड्रामा कर रहे हैं, प्रशासन की ये कौन सी और कैसी पहल है? जवाब- जिला प्रशासन ने नितारा प्रोग्राम शुरू किया है। जिसमें जिला प्रशासन और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के सहयोग से प्रोग्राम चल रहा है। यहां पुनर्वासित लोगों को ड्रामा सीखा रहे हैं। पुनर्वासित लोग मॉक पार्लियामेंट और ग्रामसभा कर रहे हैं। हमारी सोच है कि इसके आधार पर उन्हें अपने मौलिक अधिकारों का पता चले। संविधान के बारे में जानकारी मिले। साथ ही शासन-प्रशासन की योजनाओं की जानकारी मिले। सवाल- कितने लोगों को ट्रेनिंग दी जा रही है? जवाब – अब तक 295 लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो गई है। वर्तमान में नितारा में 134 लोगों की ट्रेनिंग चल रही है। सवाल – क्या मानसिक रूप से इन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है? जवाब – हाल ही में इन्हें विधानसभा भ्रमण के लिए भेजा गया था। जब लौट कर आए तो इनकी सोच काफी हद तक बदल गई। ये सारे हार्डकोर नक्सली रहे हैं। ………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सरेंडर नक्सलियों ने देखी विधानसभा की कार्यवाही: झीरम हमले का मास्टरमाइंड भी पहुंचा; विपक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति मांगी, वित्तमंत्री के जवाब पर हंगामा छत्तीसगढ़ के 120 सरेंडर नक्सलियों ने आज विधानसभा की कार्यवाही देखी। इनमें 1 करोड़ का इनामी पूर्व नक्सली रुपेश और झीरम हमले का मास्टरमांड चैतू भी कार्यवाही देखने पहुंचा था। इससे पहले गुरुवार रात ये सभी नक्सली डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर
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