![]()
बिलासपुर के कंपनी गार्डन (विवेकानंदन उद्यान) में सुबह मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इस घटना में 25 से अधिक लोग घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए सिम्स अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद उद्यान की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। उद्यान प्रभारी श्रीकांत नायर ने बताया कि मधुमक्खियों के छत्ते हटाने के लिए निगम के पास कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्ता हटाने के लिए बाहर से लोगों को बुलाया गया था, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुआ। छत्ते से छेड़छाड़ पर मधुमक्खियों ने किया हमला प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आशंका है कि किसी असामाजिक तत्व ने गार्डन के पेड़ों पर लगे मधुमक्खियों के छत्ते से छेड़छाड़ की, जिससे वे आक्रामक हो गईं। अचानक हुए इस हमले से उद्यान में मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई और वे जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सुबह की सैर करने आए लोग इस घटना से सर्वाधिक प्रभावित हुए। मधुमक्खियों के काटने से कई लोगों के चेहरे, कान और शरीर पर सूजन आ गई। भगदड़ के दौरान कुछ लोग गिर भी पड़े। जान बचाने के लिए लोग गोल बाजार और संतोष भवन की ओर भागते देखे गए। घटना के बाद उद्यान में दहशत का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई थी। इस घटना ने उद्यान की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज आवाज से भड़कीं मधुमक्खियां मधुमक्खियों के हमले से प्रभावित अमर कुमार रूपानी ने बताया कि स्पीकर पर तेज आवाज में गाना बज रहा था, जिसके चलते मधुमक्खियां भड़क गईं और वह सैर करने पहुंचे लोगों पर टूट पड़ी। उद्यान में पहुंचे 20-25 लोगों को मधुमक्खियों के डंक लगे, जिससे उनके चेहरे, कान, आंख के नीचे सूजन आ गई। वहीं दयाराम लालवानी, रूपा मंगोड़ा और कविता चावला ने बताया कि जब वह लोग पारंपरिक रूप से पूजा आरती कर रहे थे, तभी मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया। समाज के लोग हर वर्ष यहां शहीदी दिवस के मौके पर इकट्ठे होते हैं और पूजा करते हैं। मधुमक्खियों के हमले से घायल लोगों में नरेश घेलानी, रामकुमार डोडवानी, अशोक टेकचंदानी, श्रीचंद नेहलानी सहित 20-25 लोग शामिल थे। ये लोग सरकंडा, सिंधी कालोनी, मसानगंज आदि क्षेत्रों से आए हुए थे। घी के दिए जलाने से मधुमक्खियों ने किया हमला उद्यान प्रभारी ने सफाई दी कि पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने के कारण उठे धुएं से मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। दीया जलाने से पहले चौकीदारों ने मना किया था।
<
