![]()
आज से पूरे प्रदेश के सभी जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का ठेका हिन्दुस्तान लाइफकेयर लिमिटेड (एचएलएल) को मिलने जा रहा है। इसकी शुरुआत सुकमा जिले से हो रही है। भास्कर ने जब इस एमओयू को समझा तो कमाई का पीपीपी मॉडल सामने आया। पहले तो बिना टेंडर किए नियमविरुद्ध तरीके से एचएलएल को सीधे काम सौंप दिया गया। यही नहीं पैथोलॉजिस्ट – लैबटेक्निशियन, जगह और चालू मशीनें भी मुफ्त में दी जा रही हैं। जबकि डीकेएस में चल रहे पीपीपी मॉडल में यह सब कंपनी खुद वहन कर रही है। अब सरकारी अस्पतालों में जितने मरीजों की खून जांच होगी उसकी कीमत एचएलएल सरकार से वसूलेगा। इसकी रेट लिस्ट केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) में तय कीमतों से 14 प्रतिशत कम तय की गई है। विभागीय जानकारों की मानें अब तक जो जांच 100 रुपए के सरकारी खर्च पर हो जाती थी, उसके लिए विभाग के 200 रुपए लगेंगे।
टेंडर प्रक्रिया नियम का उल्लंघन किया गया। पीएसयू को बिना टेंडर किए नहीं दे सकते हैं। मैंने इसकी शिकायत मुख्य सचिव से की है। एचएलएल खुद काम नहीं करती है। ठेकेदारों को देती है यानी पूरी व्यवस्था निजी हाथों में जाने वाली है। डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चिकित्सा प्रकोष्ठ, प्रदेश कांग्रेस एक हजार करोड़ की मशीनें एचएलएल रायपुर में राज्य स्तरीय रिफरेंस लैब खोलेगा। 4 संभाग में एक डिविजनल रिफरेंस सेंटर बनाएगा। हर जिले और सामुदायिक केंद्र में लैबोरेटरी चलाएगा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कलेक्शन सेंटर के तौर रखेगा। इन सभी जगहों पर हमर लैब के तहत कुछ महीने पहले ही मशीनों की खरीदी हुई थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो करीब एक हजार करोड़ की चालू मशीनें केंद्रों में हैं। 2.5 करोड़ वेतन देगी सरकार प्रदेश में नियमित और बांड वाले पैथोलॉजिस्ट मिलाकर करीब 100 डॉक्टर हैं और 600 लैब टेक्नीशियन हैं। डॉक्टरों को औसत 1.25 लाख रुपए महीने वेतन दिया जाता है। लैब टेक्नीशियन को औसत 25 हजार रुपए मासिक मिलते हैं। इस तरह 2.5 करोड़ रुपए पैथोलॉजी में काम करने वालों को वेतन दिया जाता है। अब ये वेतन तो सरकार ही देगी लेकिन इनसे काम एचएलएल लेगा। सब देकर दोगुनी कीमतें चुकाएगी सरकार
एचएलएल को सीजीएचएस रेट लिस्ट से हर जांच का 14 प्रतिशत कम कीमत दिया जाएगा। अभी सरकार को सिर्फ री-एजेंट और मशीनों को खरीदना पड़ता। ऐसे में साल का करीब 250 से 300 करोड़ रुपए खर्च होता था। अब माना जा रहा है कि 350-400 करोड़ रुपए खर्च होगा। जब हमने एचएलएल की खून जांच कीमत और कुछ निजी पैथालॉजी में चल रहे पैकेज से तुलना की तो कीमतें भी अधिक नजर आईं। एचएलएल को नियमानुसार काम दिया गया है। कांग्रेस में भी हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई थी जिसे खारिज कर दिया गया। फ्री डायग्नोस्टिक सर्विस इनिशिएटिव के तहत एचएलएल को यह काम दिया गया है। आज सुकमा से इसकी शुरुआत होगी, अगले तीन महीने वे प्रदेश में पैथालॉजी लैब शुरू कर देंगे। -अमित कटारिया, सचिव, स्वास्थ्य विभाग टेंडर न करने पर सवाल
राजस्थान, असम जैसे कई राज्य में पीपीपी मॉडल पर सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब चल रही हैं। वहां टेंडर प्रक्रिया को अपनाया गया। एम्स में भी पांच कंपनियों से रेट लेकर सबसे कम वाले को काम दिया जाता है। आरोप है कि केंद्रीय भंडार क्रय नियम के तहत केंद्र सरकार के मद से चल रही योजनाओं को नॉमिनेशन पर नहीं दिया जा सकता। 60 लाख रुपए से अधिक के किसी काम को बगैर टेंडर के नहीं दिया जा सकता। महामारी जैसी विशेष परिस्थितियों में ही नॉमिनेशन पर काम दिया जा सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में सामान्य स्थिति होने पर भी एचएलएल को सीधे नॉमिनेशन पर काम सौंप दिया गया।
<
