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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के जंगल में नक्सली डंप से 1 करोड़ कैश मिला है। मंगलवार को अबूझमाड़-महाराष्ट्र बॉर्डर से लगे जंगल में सुरक्षाबलों की टीम सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। इस दौरान अलग-अलग इलाकों से बड़ी मात्रा में कैश और नक्सली सामान जमीन पर गढ़ा हुआ मिला, जिसे बरामद किया गया है। डंप में IED बनाने का सामान, हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग का सामान था। वहीं, कुछ पोस्टर भी मिले हैं, जो नक्सलियों के लीडर के बताए जा रहे हैं। इतनी बड़ी रकम कहां से आई पुलिस इसकी जांच कर रही है। जिले में 1 महीने से सर्चिंग अभियान जारी ‘माड़ बचाओ अभियान’ के तहत ये कार्रवाई नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने की। नारायणपुर SP रोबिनसन गुड़िया ने बताया कि, पिछले एक महीने से जिले में लगातार सर्चिंग और एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान अलग-अलग जगहों पर नक्सलियों के छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक सामग्री के डंप का पता चला। 1 साल में 270 हथियार बरामद एसपी ने बताया कि साल 2025-26 में अब तक जिले में कुल 270 हथियार रिकवर किए जा चुके हैं। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि जंगलों या आसपास किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और केंद्रीय बलों को दें, ताकि जिले को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाया जा सके। बीजापुर में मिला था 14 करोड़ का डंप बीजापुर में 31 मार्च को नक्सलियों का छिपाया हुआ 14 करोड़ का माल मिला था। उसी दिन बीजापुर में 25 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इनसे मिले इनपुट के बाद ही 3 करोड़ कैश और 7 किलो गोल्ड बरामद किया गया था। ये अब तक का सबसे बड़ा डंप है। बस्तर में मिला था कैश गोल्ड 2 महीने पहले बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 108 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। ये नक्सली अपने साथ जंगल से 1.64 करोड़ का 1 किलो सोना, 3 करोड़ 61 लाख कैश और 101 हथियार साथ लेकर आए थे, जो पुलिस को सौंप दिया था। बताया गया कि लेवी वसूली के दौरान नक्सलियों ने यह पैसा इकट्ठा किया था। …………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… कभी थामी थी बंदूक, अब थिएटर में बने मंत्री-विधायक: नारायणपुर में सरेंडर्ड नक्सलियों का मेंटल ट्रांसफॉर्मेशन, ड्रामा के जरिए समझ रहे लोकतंत्र और अपना अधिकार कभी जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उन नन्हें हाथों में बंदूक थमा दी गई। स्कूल यूनिफॉर्म की जगह काली वर्दी, और कक्षा की जगह घने जंगल उनकी दुनिया बन गए। 10-12 साल की उम्र में ही उन्हें लोकतंत्र नहीं, बल्कि जनताना सरकार का कानून सिखाया गया, जहां अदालत भी उनकी, फैसला भी उनका और सजा भी उनकी। पढ़ें पूरी खबर…
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