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Home » अधिकारी-कारोबारियों की 382 करोड़ की संपत्ति अटैच, चुनाव में फंडिंग; विदेशों में निवेश का खुलासा
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अधिकारी-कारोबारियों की 382 करोड़ की संपत्ति अटैच, चुनाव में फंडिंग; विदेशों में निवेश का खुलासा

By adminDecember 29, 2025No Comments4 Mins Read
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28 12 2025 09 07 2025 liquor scam 1
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राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर: शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो साल की जांच के बाद विशेष कोर्ट में फाइनल चार्जशीट दाखिल की है। इस दौरान कार्रवाई करते हुए तीन शराब कंपनियों के साथ अधिकारी-कारोबारियों की कुल 382 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी अटैच कर चुकी है।

चार्जशीट में बताया गया है कि तीन शराब कंपनियों भाटिया वाइन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरी और वेलकम डिस्टलरी की करीब 68 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई है। इसके अलावा तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास समेत 31 आबकारी अधिकारियों की लगभग 38 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। चार्जशीट में गिरफ्तार 22 अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं सहित कुल 81 लोगों को आरोपित बनाया गया है। ईडी के अनुसार घोटाले की रकम करीब 3,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

59 नए के साथ 22 पुराने आरोपियों के नाम

ईडी ने इस मामले में 59 नए आरोपियों को चार्जशीट में शामिल किया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास, केके श्रीवास्तव, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा के बेटे यश टुटेजा, कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू,एफएल-10 लाइसेंस धारक, डिस्टिलरी संचालक और आबकारी विभाग के अधिकारी आदि के नाम शामिल हैं।

16 दिसंबर को ईडी ने सौम्या चौरसिया को इस मामले में दोबारा गिरफ्तार भी किया था। चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेन-देन, काल डिटेल रिकार्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और गवाहों के बयान को अहम आधार बनाया गया है।

जांच की समय सीमा उच्च न्यायालय से बढ़ाने की मांग

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब कोर्ट में ट्रॉयल की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले आरोप तय किए जाएंगे, इसके बाद गवाहों के बयान और साक्ष्यों पर सुनवाई होगी। हालांकि, मामले की जांच कर रही एसीबी-ईओडब्ल्यू ने सुप्रीम कोर्ट से जांच की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।

इधर, इससे पहले 22 दिसंबर को ईओडब्ल्यू ने विशेष कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 3,800 पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। ईओडब्ल्यू का दावा है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 200 से 250 करोड़ रुपये मिले और सिंडिकेट के जरिए अवैध वसूली में उनकी अहम भूमिका रही।

15 जिलों में पोस्टिंग से लेकर विदेशी निवेश का राजफाश

चार्जशीट में 9,00 गावाहों को शामिल करने के साथ घोटाले से जुड़े कई अहम राजफाश किए गए हैं। ईडी के अनुसार आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए होटल कारोबारी अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, रिटायर आइएएस अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया ने मिलकर एक संगठित सिंडिकेट बनाया था।

इस सिंडिकेट ने राज्य के 15 जिलों को शराब घोटाले के लिए चिह्नित किया और अपने मुताबिक अधिकारियों की पोस्टिंग कराई। सिंडिकेट ने पहली अहम पोस्टिंग आइएएस निरंजन दास की कराई, जिन्हें आबकारी आयुक्त बनाया गया। इसके बाद आबकारी नीति में बदलाव किया गया और फिर अवैध वसूली व कमीशन का खेल शुरू हुआ। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे तंत्र में पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू को भी शामिल किया गया।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में मिट्टी के 1.75 लाख नमूनों की जांच में 76% में नाइट्रोजन लगभग शून्य

विधानसभा चुनाव के लिए केके और अफसरों ने की थी फंडिग

ईडी के अनुसार शराब घोटाले से एकत्र रकम के बंटवारे की जिम्मेदारी अनवर ढेबर, लक्ष्मीनारायण बंसल (पप्पू), कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव और विकास अग्रवाल पर थी। श्रीवास्तव समेत 29 आबकारी अफसरों ने मिलकर विधानसभा चुनाव 2023 के लिए एक दल के लिए करोड़ों की फंडिंग की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि केके श्रीवास्तव जेल में बंद है जबकि लक्ष्मी नारायण बाहर घूम रहा है। दोनों की भूमिका कूरियर मैन की तरह बताई गई है।

एजेंसी का दावा है कि सिंडिकेट में चैतन्य बघेल व यश टुटेजा की बड़ी भूमिका थी। शराब की बोतल में 32 करोड़ डुप्लीकेट होलोग्राम का उपयोग किया गया। ईडी ने इस घोटाले में करीब 2800 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का दावा किया है, जबकि ईओडब्ल्यू इसे करीब 3,200 करोड़ रुपये का घोटाला मान रही है। एजेंसियों का अनुमान है कि यह रकम 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

दुबई, नीदरलैंड और लंदन में करोड़ों का निवेश

ईडी के अनुसार शराब घोटाले की बड़ी राशि हवाला के जरिए विदेश भेजी गई। दुबई, नीदरलैंड और लंदन में सिंडिकेट से जुड़े मुख्य आरोपितों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर निवेश किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चार्जशीट का विशाल आकार और आरोपितों की संख्या इस केस को लंबा और जटिल बना सकती है।



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