हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बैंक खाते में नामांकन होने मात्र से ही किसी व्यक्ति को मृतक की जमा राशि का मालिकाना हक नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा कि नामिनी सिर्फ राशि का अभिरक्षक होता है, न कि वारिस। इस फैसले के साथ ही 15 लाख रुपये पर चल रहा ससुर और दामाद का विवाद भी खत्म हो गया है।
Publish Date: Mon, 01 Dec 2025 09:06:36 PM (IST)
Updated Date: Mon, 01 Dec 2025 09:10:36 PM (IST)

HighLights
- किसी व्यक्ति को मृतक की जमा राशि का मालिकाना हक नहीं मिल जाता।
- कोर्ट ने कहा कि नामिनी सिर्फ राशि का अभिरक्षक होता है, न कि वारिस।
- 15 लाख रुपये पर चल रहा ससुर और दामाद का विवाद भी खत्म हो गया है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कर्मचारियों के बैंक अकाउंट के नामिनी को लेकर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आया है। कोर्ट ने साफ कहा है, कर्मचारी के बैंक अकाउंट का नामिनी सिर्फ अकाउंट का अभिरक्षक होता है। मालिक की भूमिका नहीं रहती। वह बैंक अकाउंट का मालिक नहीं हो सकता।
मृत कर्मचारी के बैंक अकाउंट में जमा 15 लाख रुपये को लेकर मृत महिला कर्मचारी के ससुर और दामाद दोनों ने दावा ठोक दिया था। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दामाद की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। 15 लाख की रकम को लेकर ससुर-दामाद के दावों के बीच हाई कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार कानून का हवाला देते हुए ससुर के दावे को सही ठहराया है।
पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बैंक खाते में नामांकन होने मात्र से ही किसी व्यक्ति को मृतक की जमा राशि का मालिकाना हक नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा कि नामिनी सिर्फ राशि का अभिरक्षक होता है, न कि वारिस। इस फैसले के साथ ही 15 लाख रुपये पर चल रहा ससुर और दामाद का विवाद भी खत्म हो गया है।
क्या है पूरा मामला
- स्वास्थ्य कार्यकर्ता रंजनादेवी प्रधान के नाम से बैंक आफ इंडिया, मुंगेली शाखा में 15 लाख रुपये जमा था। उनकी मृत्यु के बाद दामाद राहुल ध्रुव और ससुर लल्लाराम दोनों ने इस रकम पर दावा ठोक दिया था। ट्रायल कोर्ट ने नामांकन देखकर रकम दामाद को देने का आदेश दिया था।
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