![]()
कोंडागांव जिले में वर्षों पुराने भू-अभिलेखों को सुरक्षित करने का काम शुरू हो गया है। जिला प्रशासन ने इन महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड्स को लेमिनेट करने और डिजिटाइज करने की पहल की है, ताकि वे भविष्य में खराब होने से बच सकें। लंबे समय से यह समस्या थी कि कई राजस्व रिकॉर्ड दीमक लगने या छूने मात्र से ही फट जाने के कारण खराब हो रहे थे। इन जर्जर दस्तावेजों को संरक्षित करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। इस पहल के तहत, पहले सभी भू-अभिलेखों को लेमिनेट किया जा रहा है ताकि उनकी भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही, इन सभी रिकॉर्ड्स को स्कैन करके डिजिटल प्रारूप में कंप्यूटर में दर्ज किया जा रहा है। यह प्रक्रिया दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखेगी और जरूरत पड़ने पर उनकी आसान उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। कंपनी पिछले एक महीने से लगातार काम कर रही इस कार्य की जिम्मेदारी जांजगीर की एक निजी कंपनी को सौंपी गई है, जो पिछले एक महीने से इस परियोजना पर लगातार काम कर रही है। कार्य योजना के अनुसार, दस्तावेजों का एक सेट लेमिनेटेड रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि सभी रिकॉर्ड का डिजिटल बैकअप तैयार किया जा रहा है। अपर कलेक्टर चित्रकांत चार्ली ठाकुर ने बताया कि पुराने भू-अभिलेखों के जर्जर होने और दीमक से प्रभावित होने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। उन्होंने कहा कि कई दस्तावेज इतने नाजुक थे कि उन्हें छूने से ही नुकसान पहुंच रहा था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए प्रशासन ने लेमिनेशन और डिजिटाइजेशन का यह कार्य शुरू किया है। इस पहल से आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें अपनी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड प्राप्त करने में कोई परेशानी नहीं होगी, और न ही दस्तावेजों के खराब होने की चिंता रहेगी।
<
