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नेहरू नगर जैन मंदिर के इतिहास में पहली बार चातुर्मास की समापन बेला पर पिच्छी परिवर्तन महोत्सव हुआ। सुबह भक्तों ने श्रीजी के अभिषेक व मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ पूजन किया। प्रारंभ में मयूर पंख से तैयार पिच्छी को महिलाओं ने शीष पर विराजमान कर व प्रमुख पा
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इस अवसर पर अनेक विविध सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम हुए, जिसमें संत आचार्य विद्यासागर व आचार्य समयसागर महाराज के चित्र का अनावरण विभिन्न मंदिरों के पदाधिकारियों ने किया। बाल ब्रह्माचारी लौकान्तिक देव आग्रह, अपूर्व, आर्जव, अनंत, हितार्थ, विज्ञ, ईशान, विहान, विवान, वेद, युग, सार्थक द्वारा मंजीरा भक्ति नृत्य कर व आरोही – अवनि द्वारा मंगलाचरण किया गया। आचार्य विद्यासागर महाराज के तैलचित्र का अष्ट द्रव्य के साथ पूजन किया गया। सौधर्म इंद्र- इन्द्राणियों ने द्रव्य समर्पित किए। समाज के लोगों ने भजन, नृत्य करते हुए भक्ति की। माताजी को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य निरंजन जैन परिवार, लता नागेंद्र, समपर्ण निर्भय जैन परिवार को मिला।
कार्यक्रम में सभी सौभाग्यशाली परिवार व उपस्थित सभी माताजी के गृहस्थ जीवन के परिजनों का स्वागत व सम्मान किया गया। नगर गौरव मुनि प्रणेय सागर व आर्यिका रजतमती माता के परिजनों को भी सम्मानित किया गया।
जैन युवा संघ के सचिन, गौरव, परेश, रितेश, आलोक, आनंद, क्षितिज, अंकित व अनेकांत ने छत्तीसगढ़िया नृत्य प्रस्तुत किया। संस्कृति ग्रुप की ऋचा, अंकिता, निकिता, महिमा, प्रीति, किरण जैन ने मां की ममता नामक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। माता जी को नई पिच्छी देने का सौभाग्य विभिन्न समाज के पदाधिकारियों व भक्तों को मिला। आर्यिका निर्मदमती माता की पुरानी पिच्छी साधना – शैलेन्द्र जैन परिवार, आर्यिका अक्षयमती माता की पुरानी पिच्छी मुक्ति- अजित जैन परिवार को मिली।
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