छत्तीसगढ़

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम: 1.70 लाख शिक्षार्थियों ने दी आकलन परीक्षा, 821 पूर्व माओवादियों ने थामी कलम

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को आकलन परीक्षा आयोजित की गई। बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान आकलन परीक्षा में उम्र और सामाजिक बाधाओं को पीछे छोड़कर एक लाख 70 हजार शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया।

प्रदेश के 20 हजार से अधिक ग्राम और वार्डों में आयोजित इस परीक्षा में बीजापुर से सर्वाधिक 31,250 और कोरिया से 250 शिक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा की सबसे अच्छी तस्वीर बस्तर संभाग से सामने आई, जहां पुनर्वास की राह पर लौटे 821 पूर्व माओवादियों ने बंदूक छोड़कर कलम थामी।

जेलों में सजा काट रहे 423 कैदियों और 51 ट्रांसजेंडर ने भी परीक्षा देकर शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने का संदेश दिया। कोरबा के 96 वर्षीय तमन साव ने उम्र की सीमा को चुनौती देते हुए परीक्षा दी। केंद्र के शिक्षा मंत्रालय के उप सचिव चरणजीत तनेजा ने परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया।

साक्षरता परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर परिवार के सदस्यों ने साथ बैठकर शिक्षा की नई मिसाल पेश की। कहीं सास-बहू, कहीं दादा-पोता, तो कहीं पति-पत्नी, नाना-नानी और भाई-बहन एक साथ परीक्षा देते नजर आए। दिव्यांगजनों ने भी पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की।

केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुई परीक्षा में सफल शिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अभियान की सफलता पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। यह पहल प्रदेश को पूर्ण साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ाने के साथ उन लोगों के लिए भी अवसर बनी, जो किसी कारण से औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे।

उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत केंद्रीय जेल में राष्ट्रव्यापी महापरीक्षा अभियान आयोजित किया गया। परीक्षा में 103 शिक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। परीक्षा निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ संपन्न हुई।

परीक्षा केंद्र का जिला शिक्षा अधिकारी एम. सतीश नायर, जिला परियोजना अधिकारी डॉ. कामिनी बावनकर, प्राचार्य हितेश दीवान, सहायक प्राध्यापक मुकुंद साहू और अजय मिश्रा ने निरीक्षण किया। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यह अभियान जेल में निरुद्ध शिक्षार्थियों को साक्षरता की मुख्यधारा से जोड़ने तथा पढ़ने-लिखने के साथ दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी कौशल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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