पेंड्रा ब्लॉक के दूरस्थ गांव बम्हनी में शासकीय स्कूल भवन जर्जर हालत में है। यहां प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक, दो अलग-अलग स्कूलों के लिए एक भी काम लायक शौचालय नहीं है। बच्चे खुद दूर से पानी भरकर लाते हुए देखे जा रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को
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कक्षा एक से आठवीं तक के लिए कुल पांच कमरे हैं, जिनमें से कई इतने जर्जर हैं कि उनमें पढ़ना जोखिम भरा है। बालवाड़ी, पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चे एक ही कमरे में बैठते हैं। इस कमरे की छत से प्लास्टर झड़ रहा है और दीवारों पर सीपेज के कारण काई लग चुकी है।

बच्चों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा
बच्चों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित कमरों की कमी है। कक्षाओं में ही स्कूल का राशन और खेल का सामान भी रखा जाता है। इन अव्यवस्थाओं के बीच, स्कूल स्वीपर का ढर्रासाही रवैया भी सामने आया है। शौचालय में पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बजाय, बच्चों को दूर से पानी लाते हुए देखा जा रहा है।
ऐसे असुरक्षित और असुविधाजनक माहौल में बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर सवाल उठते हैं।

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने कहा कि जिन स्कूलों की बिल्डिंग कक्षाएं चलाने लायक नहीं थी, वहां पुरानी इमारत को हटाने (डिस्मेंटल करने) के लिए बीओ को निर्देश दिए गए थे।
सभी संकुल समन्वयकों को बुलाकर एक-एक स्कूल का भौतिक सत्यापन कराया गया। जहां कक्षाएं नहीं चल पा रही थी, उनकी सूची बनाकर कलेक्टर को भेज दी गई है।
डीएमएफ फंड से जरूरत वाले स्कूलों में काम को मंजूरी दी जा रही है। हम कोशिश कर रहे हैं कि इन स्कूलों में काम जल्दी से जल्दी पूरा हो जाए।


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