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तकनीक और मशीनों के उपयोग से खेती को बनाया स्मार्ट और आसान, इससे धन और श्रम दोनों की बचत हो रही है
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खेत में यदि तकनीक का सटीक प्रयोग किया जाए तो इससे धन और श्रम दोनों की बचत की जा सकती है। यानी लागत घटाकर खेती को घाटे से मुनाफे की ओर ले जाया जा सकता है। जांजगीर जिले के अकलतरा ब्लॉक में पौना गांव के किसान फड़ेश्वरनाथ पाटले ने ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने आधुनिक सोच के साथ तकनीक का इस्तेमाल कर खेती को स्मार्ट और आसान बना लिया है।
फड़ेश्वरनाथ ने बताया, “पिता गुहाराम पाटले परंपरागत तरीके से ही धान की खेती करते आए थे। लेकिन मैंने कुछ नया करने की सोची। मैंने देखा कि धान की रोपाई में 30 से 35 मजदूर लगते हैं। कई बार मजदूर नहीं मिलने पर खेती करना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में बड़े भाई गोपेश पाटले ने खेती को तकनीक से जोड़ने की सलाह दी।”
इस पर मैंने विशेषज्ञों और सोशल मीडिया से जानकारी जुटाई और धीरे-धीरे आधुनिक मशीनें खरीदनी शुरू कीं। सबसे पहले 2002-03 में रीपर लाया। इससे कटाई का काम आसान हो गया। फिर थ्रेसर खरीदा, जिससे मिंसाई में समय कम लगने लगा। इस कड़ी में बड़ा बदलाव तब महसूस हुआ, जब ऑटोमैटिक राइस ट्रांसप्लांटर खरीदा। क्षेत्र में यह मशीन पहली बार मैं ही लाया।
इसमें केवल 5-6 मजदूरों की जरूरत पड़ती है और एक-दो दिन में ही पूरे खेत में धान की रोपाई हो जाती है। इससे हर दिन मजदूरी के 5 हजार रुपए की बचत होने लगी। समय बचने के साथ लागत 70% तक कम हो गई। समय बचा तो अब धान की नर्सरी मैं खुद ही तैयार कर रहा हूं।
किसान फड़ेश्वरनाथ ने बताया, “पहले कटाई के लिए पंजाब-हरियाणा की बड़ी हार्वेस्टर मशीनों का इंतजार करना पड़ता था। हमारे गांव की मिट्टी नम होने के कारण ये मशीनें खेतों में फंस जाती थीं। इस समस्या से निपटने के लिए चैन हार्वेस्टर खरीदकर लाया।”
इससे गीली मिट्टी में भी धान की कटाई और मिंसाई दोनों आसानी से हो जाती हैं। ये सभी मशीनें आसपास के किसानों के लिए भी मददगार साबित हो रही हैं। फसल में छिड़काव के लिए मैं पावर स्प्रेयर का इस्तेमाल कर रहा हूं। इससे एक ही दिन में 5-6 एकड़ में दवा का छिड़काव हो जाता है।
पहले यही काम कई मजदूरों से 2-3 दिन में होता था। अब धान उगाने के साथ मैं बीज निगम को धान की अलग-अलग वैरायटी के बीज भी सप्लाई कर रहा हूं। गेहूं और अन्य फसलें भी लेता हूं।
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