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अंबेडकर, जिला व कालीबाड़ी सरकारी अस्पताल में ओपीडी में किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है। साथ ही ओपीडी में इमरजेंसी इलाज भी पूरी तरह फ्री है, पर अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीजों पर पार्किंग शुल्क का बोझ डाल दिया जाता है।
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दोपहिया पर आने वालों से 10 रुपए और कार वालों से 20 रुपए तक लिया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों के लिए यह रकम भी भारी पड़ती है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे अनुचित वसूली बताते हुए सरकारी अस्पतालों में पार्किंग पूरी तरह निशुल्क करने की मांग उठाई है।
दरअसल, सरकारी अस्पतालों में बाहर से पहुंचने वाले लोगों से बदतमीजी भी की जाती है। कई बार तय शुल्क से ज्यादा पैसा वसूल लिया जाता है। अगर वाहन 24 से 48 घंटे तक खड़ा रहा तो 100-200 रुपए तक मांगे जाते हैं, जबकि नियम साफ कहता है कि सरकारी अस्पताल में 24 घंटे की पार्किंग सिर्फ 10 रुपए है।
डीकेएस में 10 रुपए लग रहा ओपीडी शुल्क : दूसरी ओर, सुपर स्पेशियालिटी डीकेएस में मरीजों से ओपीडी फीस के नाम पर 10 रुपए की वसूली की जा रही है। लोगों का कहना है कि जब अंबेडकर में ओपीडी में फ्री है तो फिर डीकेएस अस्पताल में फीस क्यों ली जा रही है।
मांग: चौराहों में पार्किंग फ्री, तो फिर अस्पतालों की क्यों नहीं?
शहर के कई सामाजिक संगठन, मददगार संस्थाओं का कहना है किजब कलेक्टोरेट और जल्द ही जयस्तंभ चौक की पार्किंग फ्री की जा सकती है, तो फिर अस्पताल जैसे भीड़भाड़ और जरूरतमंद जगहों पर पार्किंग शुल्क क्यों? अंबेडकर, डीकेएस, कालीबाड़ी और जिला अस्पताल में रोजाना 5,000 से ज्यादा लोग आते-जाते हैं।
पार्किंग इसलिए दी जाती है ताकि वाहनों की व्यवस्था बनी रहे। लेकिन यदि शुल्क फ्री करने की मांग है तो प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। किसी ठेकेदार द्वारा बदतमीजी या ज्यादा वसूली की शिकायत मिले तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। – मिथिलेश चौधरी, सीएमएचओ
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