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जीपीएम जिले के सबसे दुर्गम क्षेत्र में स्थित प्राथमिक शाला ढोड़गापारा का निरीक्षण करने महिला प्राचार्य मीना शर्मा का साहसिक प्रयास शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। चारों ओर पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए लगभग 10 किमी पैदल कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है। बावजूद इसके शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कोड़गार की प्राचार्य मीना शर्मा ने मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता कार्यक्रम के अंतर्गत सामाजिक अंकेक्षण के लिए स्वयं वहां पहुंचकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्राथमिक शाला ढोड़गापारा ग्राम पंचायत बम्हनी का आश्रित मोहल्ला है, जो तान नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों, पहाड़ी चढ़ाई, बड़े-बड़े पत्थरों और पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है। क्षेत्र में जंगली जानवरों की आमद भी बनी रहती है, जिससे रास्ता और भी जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे दुर्गम स्थल पर किसी महिला प्राचार्य का पहली बार पहुंचना अदम्य साहस का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है। इस मोहल्ले में आदिवासी व पंडों जनजाति के 33 परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 109 है। ढोड़गापारा प्राथमिक शाला में दो शिक्षक राजेंद्र पैकरा व शिवदास सिंह बैगा पदस्थ हैं।
विद्यालय में कक्षा दूसरी और पांचवीं संचालित हैं, जिसमें कुल 6 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। कम छात्र संख्या के बावजूद ग्राम पंचायत मुख्यालय दूर होने के कारण स्कूल का संचालन किया जा रहा है। शनिवार को सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राचार्य मीना शर्मा के साथ व्याख्याता प्रदीप कंवर, चतुर्थ श्रेणी कर्मी तिहारू राम बैगा, विद्यालय स्टाफ, शाला विकास समिति के सदस्य, ग्रामवासी एवं छात्र उपस्थित रहे।
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