TET-एग्जाम…एक्सपर्ट की राय में हाईकोर्ट का दखल नहीं:एक नंबर कम पाने वाले 20-अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज, कोर्ट बोला- मॉडल आंसर-की से अधिकार नहीं बनता

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CG-TET -2024 की फाइनल आंसर-की में हटाए गए सवालों को दोबारा शामिल करने की मांग को लेकर याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि परीक्षा और अकादमिक मूल्यांकन के मामलों में अदालतें विशेषज्ञों की राय में तब तक दखल नहीं दे सकतीं, जब तक फैसला स्पष्ट रूप से मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या कानून के खिलाफ साबित न हो। CG-TET -2024 की फाइनल आंसर-की में सेट-ए के प्रश्न क्रमांक 56, सेट-बी के प्रश्न क्रमांक 55 और सेट-सी व डी के प्रश्न क्रमांक 57 को हटा दिया गया था, इस वजह से कई परीक्षार्थी महज 1 नंबर से पिछड़ गए थे। 20 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, इसमें बताया कि इन सवालों को परीक्षा निर्देशों के मुताबिक रद्द नहीं किया जा सकता। उनका दावा था कि मॉडल आंसर-की के आधार पर वे क्वालिफाइंग मार्क्स हासिल कर चुके थे, लेकिन फाइनल आंसर-की में सवाल हटने के बाद उनके अंक 74.5 से 74.9 के बीच रह गए। ओबीसी, एससी और एसटी अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम पात्रता अंक 75 थे। व्यापमं ने कहा- गद्यांश और सवालों का क्रम गलत था सीजी व्यापमं की ओर से बताया गया कि विवादित सवाल एक ही गद्यांश पर आधारित थे। कुछ सेट में प्रिंटिंग की गलती के कारण गद्यांश और उससे जुड़े सवाल सही क्रम में नहीं थे। इससे अभ्यर्थियों को गद्यांश उपलब्ध होने से पहले ही उससे संबंधित सवाल हल करने की स्थिति बन गई थी। मामले को विषय विशेषज्ञों की समिति के सामने रखा गया। समिति ने सभी सेट में संबंधित प्रश्नों को हटाने की सिफारिश की, ताकि सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार हो। हटाए गए सवालों के लिए समान रूप से दिए गए नंबर व्यापमं ने यह भी बताया कि हटाए गए सवालों के अंक परीक्षा निर्देशों में निर्धारित फार्मूले के अनुसार सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिए गए थे। हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि सवाल हटाने का फैसला बिना विचार किए नहीं लिया गया था। विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नों और गद्यांश के गलत क्रम से अभ्यर्थियों को होने वाली परेशानी पर विचार किया था। मॉडल आंसर-की से अधिकार नहीं बनता हाईकोर्ट ने कहा कि प्रोविजनल या मॉडल आंसर-की के आधार पर क्वालिफाइंग मार्क्स हासिल कर लेने से अभ्यर्थी का कोई कानूनी अधिकार नहीं बन जाता। अंतिम परिणाम फाइनल आंसर-की के आधार पर तैयार होता है। यह आंसर-की आपत्तियों और विशेषज्ञों की राय पर विचार के बाद जारी की गई थी। कहा कि इस मामले में प्रश्न हटाने की प्रक्रिया सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू हुई और अनुपातिक अंक भी समान रूप से दिए गए।
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