रायपुर में एयरफोर्स के स्पेशल लड़ाके करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई से पैरा जंप करेंगे।
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस (राज्योत्सव) के 25 साल पूरे होने पर इस बार राजधानी रायपुर के सेंध तालाब के ऊपर भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एयरोबेटिक टीम पहली बार एयर शो करने जा रही है। इसके अलावा एयरफोर्स के स्पेशल लड़ाके भी करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई से पैरा
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हालांकि इस संबंध में एयरफोर्स की ओर से अब तक कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं आई है, लेकिन भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार रविवार को पैराट्रूपर ट्रेनिंग स्कूल के एक इंस्ट्रक्टर रायपुर पहुंचे हैं, जो करतब दिखाएंगे।
इन्होंने पैरा जंपिंग के स्यू टेबल जगह मार्क कर ग्रीन फ्लैग दे दिया है। इसके बाद अब करीब 8 लोगों की स्पेशल टीम जल्द ही रायपुर पहुंच सकती है। अब तक की मिली जानकारी के अनुसार ये जंप भी 5 नवंबर की जा सकती है।

प्लेन से जंप करता हुआ भारतीय सेना का जवान। (फाइल फोटो)
2 प्रकार के होते हैं पैरा जंप
जवानों को 2 तरह की जंप की ट्रेनिंग दी जाती है। पहला स्टैटिक लाइन जंप और दूसरा फ्री फॉल। स्टैटिक लाइन जंप सैन्य पैराशूट कि वो तकनीक है, जिसमें जवान प्लेन से कूदते हैं। पैराशूट अपने-आप खुल जाता है।
ये सैनिकों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से युद्ध क्षेत्र में पहुंचाने के लिए होता है। स्टैटिक लाइन जंप 800–1200 फीट की ऊंचाई से की जाती है। ये बेसिक जंप होती है, और इसमें खतरा भी कम होता है।
तस्वीरों से समझिए कैसी होती है स्टैटिक लाइन जंप

प्लेन में इस तरह जंपर्स को एक सीक्वेंस में बैठाया जाता है।

सब कुछ ठीक रहने पर उस्ताद के डायरेक्शन पर जंपर्स एक लाइन से एक के बाद एक जंप करते हैं।

जंप के बाद इस तरह का फार्मेशन बनता है।

लैंडिंग के दौरान की तस्वीरें।
रायपुर में फ्री फॉल जंप करेंगे जवान
वहीं फ्री फॉल जंप एक अत्यंत उन्नत सैन्य पैरा-जंपिंग तकनीक है, जिसमें कमांडो विमान से कूदकर काफी ऊंचाई तक बिना पैराशूट खोले गिरते हैं। निर्धारित ऊंचाई पर जाकर पैराशूट खोलते हैं। इसका उद्देश्य गोपनीय ऑपरेशन, रैपिड इनसेर्शन, लॉन्ग-रेंज पैठ और विशेष मिशनों में अदृश्य रूप से जमीन पर उतरना होता है।
ये जंप आमतौर पर 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई से की जाती है। कई मौकों पर सैनिक 30 हजार फीट ऊंचाई से भी जंप करते हैं। फ्री-फॉल तकनीक का प्रारंभ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ। 1950–60 के दशक में अमेरिकी और रूसी स्पेशल फोर्सेज ने इसे विकसित किया।
अमेरिका की यूएस आर्मी स्पेशल फोर्स और CIA ने वियतनाम युद्ध के दौरान इसका तकनीक का विशेष उपयोग किया। इसके बाद SAS (यूके), रूसी स्पेत्सनाज और दूसरे प्रमुख देशों की स्पेशल फोर्सेज ने इसे अपनाया।

जमीन से कुछ इस तरह का दृश्य देखने को लोगों को मिल सकता है।
सूर्य किरण की टीम 40 मिनट तक दिखाएगी करतब
वहीं 5 नवंबर को सुबह 10 बजे सूर्य किरण के 9 फाइटर जेट्स आसमान में एक साथ करतब दिखाएंगे। करीब 40 मिनट तक चलने वाले इस शो में फॉर्मेशन फ्लाइंग और एयरोबेटिक स्टंट्स देखे जा सकेंगे।

फ्री फॉल जंप।
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