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Scientific Protocol From April 2026

By adminApril 29, 2026No Comments4 Mins Read
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बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोष सिद्धि दर 100 प्रतिशत करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। उन्होंने एडिशनल एसपी से लेकर सब इंस्पेक्टर तक सभी अधिकारियों को “स्मार्ट विवेचना” के लिए विस्तृत योजना और दिशा

.

आईजी गर्ग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद होने वाले हत्या के सभी मामलों की विवेचना नए वैज्ञानिक और तकनीकी प्रोटोकॉल के माध्यम से की जाएगी। इसका उद्देश्य वैश्विक मानकों के अनुरूप जांच के स्तर को सुधारना है।

बिलासपुर रेंज पुलिस अब सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रविष्टि से लेकर साइबर साक्ष्यों (जैसे CDR, IPDR, IMEI) के संकलन तक पूरी तरह से पारदर्शी और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाएगी। इससे अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसकर सख्त सजा दिलाने में मदद मिलेगी।

इस प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के एएसपी और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी वर्चुअल मोड पर शामिल हुए। आईजीपी गर्ग ने स्वयं प्रशिक्षक के रूप में पुलिस अधिकारियों को मार्गदर्शन देते हुए, पीपीटी के माध्यम से विवेचना के महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी।

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7 बिंदुओं पर होगी स्मार्ट विवेचना

1: चेकलिस्ट के मुताबिक चालान

आईजी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा दिलाना है। इस नई रणनीति के तहत बिलासपुर रेंज के पुलिस अधिकारियों के लिए मंगलवार को विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर एक चेकलिस्ट जारी किया गया , जिसके मुताबिक अब से हत्या के हर प्रकरण के चालान (Charge-sheet) में इस चेकलिस्ट का पालन अनिवार्य होगा।

2: वीडियोग्राफी करते साक्ष्यों की जब्ती

आईजी ने अफसरों को कहा कि ‘ई-साक्ष्य’ (e-Sakshya) और नए कानूनों का पालन अनिवार्य होगा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत अब सभी प्रकार की जप्ती ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से वीडियोग्राफी करते हुए की जाएगी, ताकि साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़े और गवाहों के मुकर जाने (Hostile) की स्थिति में भी तकनीकी साक्ष्य प्रभावी रहेंगे।

3:गोल़्डन ऑवर का महत्व

आईजी ने स्मार्ट विवेचना के लिए घटनास्थल पर ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व को समझते हुए क्षेत्र को तत्काल टेप लगाकर सील करने कहा। फोरेंसिक, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की उपस्थिति में ही साक्ष्य संकलन होगा। किसी भी साक्ष्य को बिना दस्ताने (Gloves) के छूना प्रतिबंधित रहेगा।

4: 124 बिंदुओं का प्रोटोकॉल फॉलो करें

पुलिस महानिरीक्षक ने अफसरों को बताया कि विवेचना में मानवीय त्रुटि को शून्य करने के लिए 124 बिंदुओं का एक प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इसमें एफआईआर से लेकर चार्जशीट फाइल करने तक की हर प्रक्रिया का Documentation शामिल है, ताकि बचाव पक्ष को तकनीकी खामियों का लाभ न मिल सके।

5: घटनास्थल की मेपिंग

इसी प्रकार विवेचक अब आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स जैसे गूगल टेकआउट (Google Takeout), इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स की बारीकी से जांच करेंगे। घटनास्थल के आसपास के 100 किमी के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की त्रिनयन ऐप के जरिए मैपिंग की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज को सीधे डीवीआर (DVR) से जप्त कर भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4)(c) के प्रमाण पत्र के साथ केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।

6: डीएनए ट्रेस करें

ट्रेनिंग में पुलिस अफसरों को DNA एवं जैविक साक्ष्यों से लिंक स्थापित करने के बारे में बताया गया कि मृतक के नाखूनों में फंसे आरोपी की स्किन, संघर्ष के दौरान टूटे बाल और कपड़ों पर मौजूद डीएनए (DNA) ट्रेस करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वैज्ञानिक रूप से आरोपी की उपस्थिति घटनास्थल पर सिद्ध की जा सके।

7: रात्रिकालीन पोस्टमार्टम एवं वीडियोग्राफी

संवेदनशील मामलों में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्याप्त रोशनी में रात में भी पोस्टमार्टम कराया जा सकेगा, जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। पीएम रिपोर्ट में स्पष्टता न होने पर डॉक्टरों से अनिवार्य रूप से एफएसएल (FSL) क्वेरी कराई जाएगी।

अफसरों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार साक्ष्यों के संकलन से लेकर उन्हें थाने के मालखाने और फिर एफएसएल (FSL) तक भेजने का पल-पल का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा, जिससे साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके।

अन्य प्रकरणों पर भी ट्रेनिंग होगी

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण के सत्र प्रति सप्ताह, अलग अलग विषयों पर रेंज के पुलिस अधिकारियों के लिए लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस अधिकारी नवीनतम अनुसंधान तकनीकों से खुद को अपग्रेड कर , कमियों को दूर कर सकें।



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