छत्तीसगढ़ के धमतरी में सिद्धि विनायक न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का पंजीयन रद्द कर दिया गया है। यह कार्रवाई आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के
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लोक स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग के उप सचिव के पत्र के आधार पर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NAFU) की एंटी-फ्रॉड यूनिट ने अस्पताल से जुड़े कई संदिग्ध मामलों की पहचान की थी। इसके बाद राज्य स्तरीय टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
योजना में शामिल दवाइयां होने के बावजूद मरीजों से अतिरिक्त पैसे वसूले जा रहे थे। एक डॉक्टर ने दूसरे अस्पताल के मरीज को अपने यहां भर्ती होने के लिए कहा था। मरीजों को यह भी बताया गया कि आयुष्मान योजना में भर्ती होने पर छुट्टी मिलने में ज्यादा समय लगेगा, लेकिन नकद भुगतान करने पर जल्दी छुट्टी मिल जाएगी।

नर्सिंग होम एक्ट के नियमों का उल्लंघन
अस्पताल में नर्सिंग होम एक्ट के नियमों का उल्लंघन पाया गया, जैसे बेड और दीवार के बीच तय दूरी का पालन नहीं करना। स्वीकृत क्षमता 30 बेड थी, लेकिन 33 मरीज भर्ती किए गए थे। विडाल टेस्ट नेगेटिव होने पर भी मरीजों को ‘एक्यूट फेब्राइल इलनेस’ पैकेज में टाइफाइड बताकर भर्ती किया गया।
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का पालन नहीं
जनरल वार्ड में इस्तेमाल हो रही सुइयों और उपकरणों की ठीक से स्टेरिलाइजेशन भी नहीं हुई थी। बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का पालन नहीं किया गया था। ओपीडी, आईपीडी और उपस्थिति रजिस्टर जैसी दस्तावेज़ी व्यवस्था भी बहुत कमजोर मिली।

अस्पताल में सुरक्षा अनुमति, स्टाफ और दस्तावेजों में भारी लापरवाही
अस्पताल ने वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए ज़रूरी एनओसी पेश नहीं की थी। फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र 26 दिसंबर 2024 को खत्म हो चुका था और इसका नवीनीकरण पांच महीने बाद किया गया। दो में से केवल एक डॉक्टर मौजूद था, बाकी लंबे समय से छुट्टी पर थे।
अस्पताल ने मरीजों के आईपीडी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए। इन सभी अनियमितताओं पर अस्पताल से मिला स्पष्टीकरण असंतोषजनक और अस्वीकार्य पाया गया।

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