रायपुर सेंट्रल जेल में वसूली और मारपीट के आरोप, वीडियो वायरल; जेल अधीक्षक ने कहा- वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं

रायपुर सेंट्रल जेल के भीतर कैदियों से वसूली और मारपीट के आरोप लगाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में कैदियों ने जेल प्रहरियों पर पैसे मांगने, पैसे नहीं देने पर मारपीट करने और वकील व स्वजन से मुलाकात में परेशानी पैदा करने के आरोप लगाए हैं।
एक कैदी ने शरीर पर चोट के निशान दिखाते हुए मारपीट का दावा किया है। साथ ही आनलाइन भुगतान के स्क्रीनशाट भी सामने आए हैं। हालांकि वीडियो और स्क्रीनशाट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
एक अन्य वीडियो में स्टुपेंड-3 से बोलने का दावा करने वाले कैदी ने जेल में पैसे मांगने और मारपीट के आरोप लगाए। उसका कहना है कि अधिकारी वीआइपी कैदियों को बेहतर सुविधाएं देते हैं और अन्य कैदियों से पैसे की मांग करते हैं। कैदी ने हाथ और पैर पर चोट के निशान दिखाते हुए दावा किया कि पैसे नहीं देने पर उसके साथ मारपीट की गई और हाथ-पैर में फ्रैक्चर हुआ है। उसने वीआइपी कैदियों को बेहतर उपचार और सुविधाएं मिलने का भी आरोप लगाया।
पहले वीडियो में कैदी ने मन्नत पुरैना, टेकराम, मिथिलेश और राजू साहू नाम के प्रहरियों पर आरोप लगाए हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ प्रहरी करीब 20 साल से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। कैदी ने लंबे समय से एक ही जगह पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
वायरल वीडियो में कैदी शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चोट के निशान दिखाता नजर आ रहा है और समय पर उपचार नहीं मिलने का दावा कर रहा है। वहीं जेल प्रबंधन ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की है।
इस बीच आंबेडकर अस्पताल में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में जेल में बंद टामन सिंह सोनवानी को कथित वीआइपी सुविधा दिए जाने का वीडियो भी सामने आया है।
वायरल हो रहा वीडियो जेल का है या नहीं, यह अभी सुनिश्चित नहीं है। जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल रायपुर योगेश क्षत्री ने कहा, “जेल में हजारों कैदी हैं। वे कब और कहां से वीडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं, यह कैसे कह सकते हैं। जेल में 200 से ज्यादा स्टाफ है। कौन है और कौन नहीं, मैं नहीं बता सकता।”



