रायपुर: एफडी तुड़वाकर ठगों के खाते में भेजे 7 लाख, डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई महिला कारोबारी
रायपुर शहर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां गंज थाना क्षेत्र के नर्मदापारा में रहने वाली 62 वर्षीय महिला रीता खन्ना को ठगों ने 5 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान आरोपियों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताकर महिला को डराया और उनसे 7 लाख रुपए की ठगी कर ली। महिला का स्टेशन रोड पर मशीन मरम्मत का कारोबार है और वह सत्कार होटल वाली गली में रहती हैं।
घटना की शुरुआत 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे हुई, जब रीता खन्ना के मोबाइल पर एक वॉट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपनी पहचान NIA रायपुर के अधिकारी विक्रम सिंह के रूप में दी। उसने महिला को बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके महाराष्ट्र में एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की बड़ी रकम पाई गई है। ठग ने दावा किया कि इस मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और उन्हें तुरंत जांच में सहयोग करना होगा।
ठगों ने महिला पर मानसिक दबाव बनाने के लिए हर आधे घंटे में फोन करना शुरू कर दिया। उन्होंने वॉट्सऐप पर एक पत्र भेजा और जांच के नाम पर सत्यापन कराने का नाटक किया। आरोपियों ने महिला को धमकी दी कि यदि उन्होंने कोई भी गलत जानकारी दी तो उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। इस दौरान ठगों ने महिला के परिवार, उनकी कुल संपत्ति, बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ली। वे लगातार महिला को फोन पर व्यस्त रखते थे ताकि वह किसी और से सलाह न ले सकें।
8 अक्टूबर को ठगी के इस खेल में एक और व्यक्ति शामिल हुआ, जिसने अपना नाम राकेश अग्रवाल बताया। उसे एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया गया, जिसने महिला को गिरफ्तारी का डर दिखाकर और अधिक डराया। ठगों ने महिला को विश्वास दिलाया कि यदि वह उनके निर्देशों का पालन करती हैं, तो वे उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचा सकते हैं और जांच पूरी होने के बाद उन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) दे दिया जाएगा। इस झांसे में आकर महिला पूरी तरह उनके नियंत्रण में आ गई।
आरोपियों के निरंतर दबाव में आकर महिला 9 अक्टूबर को केनरा बैंक पहुंचीं और अपनी एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। बैंक की छुट्टियों के बावजूद ठग लगातार फोन के जरिए महिला की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे और उन्हें निर्देश दे रहे थे। 12 अक्टूबर को ठगों ने महिला को निर्देश दिया कि वह केनरा बैंक से निकाली गई रकम को अपने एचडीएफसी बैंक के खाते में ट्रांसफर करें, ताकि वहां से आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए महिला से आरटीजीएस (RTGS) फॉर्म भरवाया। उन्होंने महिला को ‘महाकाली मेटल’ नाम के एक बैंक खाते का विवरण दिया और उसमें 7 लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा। महिला ने देवेंद्र नगर स्थित एचडीएफसी बैंक की शाखा में जाकर फॉर्म जमा किया और रकम ट्रांसफर होने के बाद उसकी रसीद भी वॉट्सऐप पर आरोपियों को भेज दी। ठगों ने महिला को यह भरोसा दिलाया था कि यह पैसा केवल जांच के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
रकम प्राप्त करने के बाद ठगों ने महिला को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नाम से एक फर्जी प्रमाणपत्र भेजा ताकि वह उन पर भरोसा करती रहें। हालांकि, जब काफी समय बीत जाने के बाद भी महिला को वादा किया गया अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं मिला, तो उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। ठगों ने उनसे संपर्क करना बंद कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने गंज थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
रायपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठगों ने महिला को पूरी तरह से डिजिटल अरेस्ट कर लिया था, जिससे वह किसी और से संपर्क नहीं कर पाईं। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जिनका उपयोग इस वारदात में किया गया था।
रायपुर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी अक्टूबर महीने में साइबर ठगों ने एक शिक्षक को 3 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 18 लाख रुपए की ठगी की थी। वहीं, एक अन्य मामले में एक कारोबारी को 44 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 8.50 लाख रुपए ठग लिए गए थे। इन सभी मामलों में ठगों ने खुद को सीबीआई, एटीएस या एनआईए का अधिकारी बताकर लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसाने का डर दिखाया था।




