छत्तीसगढ़

MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा, JDA का आंदोलन जारी; 28 सितंबर से इमरजेंसी बंद करने की चेतावनी

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) की हड़ताल के बीच सरकार ने MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा दिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रति माह कर दिया है। इस संबंध में विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। बढ़ा हुआ स्टाइपेंड 1 अक्टूबर से लागू होगा।

हालांकि, JDA ने साफ किया है कि सिर्फ इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। JDA प्रेसिडेंट डॉ. प्रीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि डॉक्टरों ने अलग-अलग स्तर के डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन जारी आदेश में केवल इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाया गया है। इसलिए डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

दरअसल, छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने गुरुवार को OPD सेवाओं का बहिष्कार किया और मेडिकल कॉलेज कैंपस में धरने पर बैठ गए। अंबेडकर अस्पताल आने वाले मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए डॉक्टरों ने धरना स्थल पर ही OPD शुरू कर दी। यहां डॉक्टरों ने प्रदर्शन के साथ मरीजों की जांच की और उन्हें प्रिस्क्रिप्शन भी दिया।

JDA प्रेसिडेंट डॉ. प्रीयूष श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार के साथ डॉक्टरों की बातचीत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के साथ चर्चा के बाद अब डॉक्टर सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों को लेकर लिखित आदेश चाहते हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बाकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।

JDA प्रेसिडेंट डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि हम अपनी जायज मांगों को लेकर यहां बैठे हैं। हमारी मांग सिर्फ स्टाइपेंड को लेकर नहीं है। हमारी मांगों का सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। हम बार-बार कहते हैं कि हम प्रदेश में मेडिकल रिफॉर्म्स की लड़ाई लड़ रहे हैं। मेडिकल रिफॉर्म्स इसलिए जरूरी है, क्योंकि जैसे-जैसे बॉन्ड की अवधि कम होगी, प्रदेश को उतनी जल्दी सुपर स्पेशलिटी और एक्सपर्ट डॉक्टर मिल सकेंगे। इसका फायदा सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी मिलेगा।

75 लाख के बॉन्ड पर सवाल उठाते हुए JDA के डॉक्टर रेशम जांगड़े ने कहा कि आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग है कि बांड व्यवस्था खत्म की जाए। डॉक्टर के लिए करीब 75 लाख रुपए की बॉन्ड राशि का प्रावधान है। अगर किसी गरीब परिवार का बच्चा मेरिट में आकर एमसीएच में चयनित होता है तो वह 75 लाख रुपए कहां से लाएगा।

JDA ने कहा कि सरकार ने सुपर स्पेशलिटी सेंटरों पर बड़ी राशि खर्च की है, लेकिन वहां पर्याप्त डॉक्टरों की भर्ती और अलग कैडर की स्थापना नहीं हो पा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब डॉक्टर ही नहीं होंगे, तो सुपर स्पेशलिटी सेवाएं कैसे शुरू होंगी। उन्होंने Super Specialty Cadre बनाने की मांग करते हुए कहा कि इससे लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, गंभीर कैंसर समेत जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधाएं प्रदेश में विकसित की जा सकेंगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी।

JDA ने कहा कि प्रदेश में कई डॉक्टर लंबे समय तक काम कर रहे हैं और इसके बावजूद उन्हें करीब 15,900 रुपए का भुगतान मिल रहा है। अन्य राज्यों में भी डॉक्टर का मानदेय छत्तीसगढ़ राज्य की तुलना में अधिक है। जूडा की मांग है कि इंटर्न, रेजिडेंट, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टरों को उनकी जिम्मेदारी और काम के अनुरूप उचित और सम्मानजनक मानदेय दिया जाए।

JDA ने कहा कि गुरुवार को OPD बहिष्कार किया गया, लेकिन मरीजों को वापस नहीं भेजा गया। धरना स्थल पर समानांतर OPD लगाकर मरीजों की जांच और इलाज किया गया। JDA प्रेसिडेंट ने कहा कि आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। मरीज उनके विरोध का कारण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और प्राथमिकता हैं।

JDA प्रेसिडेंट ने कहा कि फिलहाल डॉक्टरों का आंदोलन प्रदर्शन तक सीमित है। रायपुर के साथ बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट, इंटर्न, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 28 सितंबर से आंदोलन और तेज किया जाएगा और इमरजेंसी समेत सभी स्वास्थ्य सुविधाएं बंद करने की चेतावनी दी गई है।

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