कोंडागांव में 2 अक्टूबर को भारी बारिश के बीच दशहरा पर्व मनाया गया। इस वर्ष पहली बार रावण के साथ उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाथ के विशालकाय पुतले भी जलाए गए, जो आकर्षण का केंद्र रहे।
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सुबह से हो रही झमाझम बारिश के कारण पुतले पूरी तरह भीग गए थे, जिससे उन्हें जलाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इन पुतलों को बनाने का काम एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो गया था, जिसमें कारीगरों ने बारीकी से मेहनत की थी। भीगे होने के कारण पुतले थोड़े कमजोर भी दिख रहे थे।

छतरियां लेकर पहुंचे लोग
शाम होते ही बारिश की फुहारों के बीच भी लोग मैदान में जुटने लगे। रेनकोट, छतरियां और सिर पर कपड़े रखकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी रावण दहन देखने पहुंचे। मंच पर पारंपरिक राम-रावण संवाद का मंचन हुआ, जिसमें राम और रावण की सेनाएं भी बारिश में भीगते हुए पहुंचीं। दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का हौसला बढ़ाया।
कड़ी मशक्कत बाद हुआ दहन
मंचन के बाद जब पुतलों को जलाने की बारी आई तो आयोजकों को काफी संघर्ष करना पड़ा। भीगे होने के कारण पुतलों ने तुरंत आग नहीं पकड़ी। बार-बार मशाल लगाकर उन्हें जलाने की कोशिश की गई। कुछ देर की मशक्कत के बाद आखिरकार रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ तीनों अग्नि की लपटों में समा गए।
आसमान से बरसती बूंदों और जमीन पर उठती आग की लपटों का अद्भुत संगम देखने लायक था। पुतलों के धधकने के बाद रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने पूरे माहौल को रोशन कर दिया। लोग ‘जय श्रीराम’ के जयघोष के साथ झूम उठे।
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