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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 नवंबर को नई विधानसभा का लोकापर्ण करेंगे, लेकिन सदन की शुरूआत दिसंबर के शीत सत्र से होगी। नई विधानसभा में अभी 90 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है। लेकिन परिसीमन के बाद प्रदेश में 120 विधायक हो सकते हैं। आने वाले 25-50 साल
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इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था नई विधानसभा में की गई है। इसे पेपरलेस बनाने की तैयारी है। हर विधायक की सीट पर टेबलेट लगाए गए हैं। एआई का उपयोग कर इसे हाईटेक बनाया गया है। यह बातें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में कहीं। उन्होंने विधानसभा की कार्रवाई और अन्य सवालों के जवाब दिए। पेश हैं संपादित अंश…
नई विधानसभा में क्या अलग है? देश में ग्रीन विधानसभा के रूप में इसकी पहचान होगी। यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाला है। 51 एकड़ में 6 लाख 22 हजार स्क्वायर फीट में इसका निर्माण हुआ है। इसका डिजाइन छत्तीसगढ़ की जीवन पद्धति धान पर आधारित है। सदन के अंदर भाग को धान के कटोरे का स्वरूप दिया गया है।
पूरी विधानसभा स्थानीय चीजों से बनाई गई है। यह ग्रीन ईको फ्रेंडली है। वाटर हार्वेस्टिंग का बड़ा काम किया गया है। सोलर से पूरी विधानसभा रोशन होगी। 520 सीट का आडिटोरियम है। दर्शकों के लिए 300 सीट हैं। हर किसी की सुविधा का ख्याल रखा गया है।
कई विधानसभा की कार्यवाही लाइव देख सकते हैं, हमारे यहां यह व्यवस्था होगी? अभी एक घंटे का प्रश्नकाल ऑनलाइन होता है। यही व्यवस्था रहेगी। बाकी समय के लिए अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
बतौर अध्यक्ष विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है? अध्यक्ष का काम है कि वे नए विधायकों में आत्मविश्वास पैदा करे। पहली बार के मंत्री विपक्ष के सही जवाब दें। सदन से यह संदेश जाना चाहिए कि विकास के लिए पक्ष-विपक्ष दोनों लगे हैं। कई बार राजनैतिक कारणों से कुछ सीमाएं टूटती हैं, पर प्रयास रहता है कि अनुशासन बना रहे।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष दोनों भूमिका में काम किया है, अंतर क्या है? मुख्यमंत्री का काम कार्ययोजना और जन घोषणा पत्र क्रियान्वयन करना होता है। अध्यक्ष की भूमिका पक्ष-विपक्ष, पार्टी से ऊपर हटकर एक निष्पक्ष होती है।
विधायिका की शक्ति कार्यपालिका की तुलना में कमजोर हो रही है क्या? विधानसभा में कानून बनाने, बजट पास करने और सरकार चलाने का काम होता है। जब सत्र नहीं चलता तब समितियां काम करती हैं।
सरकार के द्वारा दिए गए आश्वासन, वादे और घोषणाओं का क्रियान्वयन करने के लिए ब्यूरोक्रेट्स को बुलाती हैं। कार्यपालिका को अंकुश में रखने के लिए ये सालभर चलता है। गड़बडिय़ां रहती हैं तो सख्त कानूनी कार्रवाई होती है।
आपके जीवन में कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां रहीं? अलग-अलग दौर में चुनौतियां आईं उससे ही रास्ता निकलता गया। पहली चुनौती मोतीलाल बोरा के सामने चुनाव लड़ने की मिली। दूसरी चुनौती प्रदेश अध्यक्ष के तौर काम करने के बाद मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी के तौर पर मिली। अब तीसरी विधानसभा अध्यक्ष बनने की आई। इन्हीं चुनौतियों से रास्ता निकलता जा रहा है।
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