छत्तीसगढ़ के कांकेर में धर्मांतरण के विरोध में रविवार को सर्व समाज का भारी आक्रोश देखने को मिला। सनातन संस्कृति और आदिवासी आस्था की रक्षा की मांग करते हुए, हजारों की संख्या में लोगों ने एक विशाल रैली निकाली। यह रैली नरहरदेव स्कूल से शुरू होकर मेला भा
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प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि लालच, दबाव और डर के माध्यम से कराए जा रहे अवैध धर्मांतरण के विरुद्ध है।
कांकेर में धर्मांतरण के खिलाफ रैली
कांकेर की सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग एकजुट हुए। विभिन्न समुदायों और समाजों के सदस्यों ने धर्मांतरण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। रैली के दौरान ‘सनातन संस्कृति की रक्षा हो’ और ‘आदिवासी आस्था का सम्मान हो’ जैसे नारे प्रमुखता से लगाए गए।
रैली के समापन के बाद मेला भाटा मैदान में एक विशाल सभा का आयोजन किया गया, जहां समाज के वरिष्ठों ने धर्मांतरण की गतिविधियों पर गंभीर आरोप लगाए।

ईश्वर कावड़े ने कहा- आदिवासियों के धर्म परिवर्तन के खिलाफ आंदोलन
ईश्वर कावड़े ने कहा कि यह आंदोलन उन ताकतों के खिलाफ है जो भोले-भाले आदिवासियों को लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। उन्होंने इसे हमारी संस्कृति और पहचान पर सीधा हमला बताते हुए सरकार से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
अवैध चर्चों और जबरन धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई की मांग
कमल किशोर कश्यप ने जोर दिया कि यह मामला अब सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ रहा है। उन्होंने अवैध रूप से संचालित चर्चों और प्रार्थना स्थलों की तत्काल जांच तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि डर या लालच से धर्मांतरण स्वीकार्य नहीं होगा।
रैली के समापन पर, सर्व समाज की ओर से राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, अवैध चर्चों पर सख्त कार्रवाई करने और आदिवासी धार्मिक स्थलों व परंपराओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस विशाल जन आंदोलन के बाद क्या कदम उठाती है।
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