छत्तीसगढ़ के धमतरी में राजाडेरा बांध टूट गया। बांध टूटने से जलाशय में भरा पानी तेजी से बहने लगा, जिससे आसपास के ग्रामीणों में चिंता फैल गई। सिंचाई विभाग ने पानी रोकने के प्रयास किए, लेकिन वे असफल रहे।
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बांध के टूटने से आसपास बना मुरमी का रपटा भी करीब 25 फीट तक बह गया। ग्रामीणों को प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई। विभाग ने रेत से भरी बोरियों का उपयोग कर पानी रोकने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
राजाडेरा बांध अपने निर्माण के समय से ही विवादों में रहा है। इस पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे। बांध का निर्माण कई हिस्सों में हुआ था, और निर्माण के तुरंत बाद ही इसके एक हिस्से की चट्टान में दरारें आ गई थीं। लगभग 10-12 साल पहले इसकी मरम्मत भी कराई गई थी। कई भागों में निर्माण के कारण सिंचाई विभाग के पास इसकी वास्तविक लागत का भी पूरा विवरण नहीं है।

बांध का गेट तो सुरक्षित है, लेकिन कुछ दिनों पहले से इसके बंड के पास छिद्र होने की बात सामने आ रही थी। बारिश के कारण बांध लबालब भरा हुआ था, जिसकी कुल जलभराव क्षमता 7.43 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) है। बंड टूटने से जलाशय का आधे से अधिक पानी व्यर्थ बह गया।
ग्रामीणों ने बांध के निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया
ग्रामीणों का कहना है कि बांध टूटने से निचले हिस्से के किसानों को नुकसान हुआ है। यह धान रोपाई का समय है, और पानी की बर्बादी के कारण किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे। ग्रामीणों ने बांध के निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया है, जिसके कारण यह घटना हुई। उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी बांध क्षतिग्रस्त हो चुका था।

एसडीओ बोले- बांध में रिसाव से किसानों को नुकसान नहीं
एसडीओ रविंद्र कुंजाम ने बताया कि 1 नवंबर को बांध में हल्का रिसाव शुरू हुआ था, जो 2 नवंबर को बढ़ गया। उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उस समय बांध में करीब 12 से 15 फीट पानी भरा हुआ था। कुंजाम ने दावा किया कि किसानों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि बांध में बहुत पहले से रिसाव था, जिसे मुरुम डालकर रोका गया था। एसडीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि बांध का कोई रखरखाव नहीं किया गया था और राजाडेरा का पानी नागदेव नाले में चला गया है।
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