9 साल बाद शुरू हुआ स्काईवॉक का काम फिर अटका।
रायपुर में सालों से विवादों में घिरा स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 21 मई 2025 से दोबारा शुरू हुआ निर्माण कार्य 20 अप्रैल 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा है।
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मौके पर स्थिति यह है कि निर्माण एजेंसी केवल सीढ़ियां लगाने में जुटी है, जबकि लिफ्ट और एस्केलेटर अब तक सिर्फ योजना में ही नजर आ रहे हैं।
दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि स्काईवॉक का उपयोग करने के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ेगी। अगर कोई इस स्काईवॉक का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे कम से कम 90-100 सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ेंगी।
अगर कोई रेरा ऑफिस की ओर से स्काई वॉक में जाना चाहता है तो उसे 50 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ेंगी, जबकि मेकाहारा-सेंट्रल जेल रोड की ओर उतरने पर लगभग 45 सीढ़ियां उतरनी पड़ेंगी।
आम जनता ने इस अधूरे काम पर नाराजगी जताई है, कुछ लोगों ने कहा कि अब इसे हटा देना चाहिए। कांग्रेस ने इसे विधायक राजेश मूणत की जिद बताया है, बीजेपी का कहना है कि 67 फीसदी जनता इसे पूरा करना चाहती है।
9 साल से अधूरे पड़े स्काईवॉक की तस्वीरें देखें…

20 अप्रैल 2026 तक स्काईवॉक बनना था, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ।

स्काईवॉक का इस्तेमाल करने के लिए 90-100 सीढ़ियां चढ़ना-उतरना पड़ेगा।

12 पाइंट से होगी एंट्री- एग्जिट
स्काई वॉक में इंट्री और एग्जिट के लिए कुल 12 जगह इंट्री और एग्जिट पाइंट है। एंजेसी की ओर से रेरा ऑफिस के पास, कलेक्ट्रेट टाउन हॉल वाले हिस्से में घड़ी चौक के पास, तहसील ऑफिस, जिला न्यायालय परिसर और सेंट्रल जेल के सामने सीढ़ियां लगाई गई हैं।
वही डीकेएस के सामने, शहीद स्मारक के पास मल्टी-लेवल पार्किंग, पुराने जेल मुख्यालय भवन के पास, डेंटल कॉलेज की ओर अंबेडकर अस्पताल के पास सीढ़ियां लगाने का काम बचा है।

अधिकारियों ने बताया कि रात में निर्माण काम किया जा रहा है।
10 महीने में पूरा नहीं हो पाया काम
करीब 8 साल से अधूरे खड़े ढांचे को पूरा करने 1 साल पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) ने टेंडर प्रक्रिया जारी की थी और 37 करोड़ 75 लाख रुपए के इस प्रोजेक्ट में PSA (PSAA कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड) कंपनी काम कर रही है। लेकिन 10 महीने बीत जाने के बाद भी भी निर्माण कार्य अधूरा है।
शास्त्री चौक पर रोटरी
शास्त्री चौक के बीचोबीच एक रोटरी बनना है, ताकि स्काई वॉक को मजबूती देने के लिए वायर से बांधा व कसा जा सके। निर्माण कंपनी इस दिशा में अभी काम कर रही है।। पिलर के ऊपर गर्डर शिफ्ट करने और उसके ऊपर शेड लगाने का काम भी चल रहा है।
PWD अधिकारियों के मुताबिक, अभी रोटरी का सिर्फ एक ही हिस्सा आया है, उस पर काम चल रहा है। आने वाले 10 दिनों में उसके और पार्ट्स आएंगे तो लगाया जाएगा।

स्काईवॉक के ढांचे में जंग लग चुके हैं।
एस्केलेटर और 3 लिफ्ट लगाने का दावा, लेकिन जगह तय नहीं
PWD अधिकारी एस. के. कोरी मुख्य अभियंता, सेतु (ब्रिज) का कहना है कि स्काईवॉक में 8 एस्केलेटर और 3 लिफ्ट लगाए जाने हैं, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन्हें कहां स्थापित किया जाएगा।
वही काम में हो रही देरी पर उन्होंने कहा कि दिन में भारी ट्रैफिक के कारण निर्माण कार्य संभव नहीं हो पा रहा है, इसलिए रात में काम किया जा रहा है। इसी वजह से प्रोजेक्ट में थोड़ी देर हो रही है, उन्होंने कहा कि काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
अब जानिए स्थानीय लोगों ने क्या कहा


कांग्रेस बोली- राजेश मूणत की जिद्द सरकार पूरा कर रही
कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री कुमार मेमन ने कहा स्काईवॉक सफेद हाथी बन गया है, 100 करोड़ लग रहे लेकिन इसकी उपयोगिता 1 रुपए की नहीं। राजेश मूणत जिद्द में इस प्रोजेक्ट को लाए थे, इसिलए वो चुनाव हारे थे। आज भी उनकी जिद्द के कारण ये सरकार प्रोजेक्ट पूरा करने में लगी है।
शास्त्री चौक से 30-50 सीढ़ी चढ़कर भी जयस्तंभ तक नहीं पहुंच रहे। मरीज मेकहारा जाने चाहे तो भी व्यहारिक रुप से ये सही नहीं है। इस 100 करोड़ की राशि कहीं किसी वार्ड में लगाए होते तो नाली, सड़क, पानी, बिजली की तमाम समस्या हल हो जाती। हठधर्मी राजेश मूणत को जनता सबक सिखाएगी।
बीजेपी बोली- इसे तोड़ना मतलब जनता के पैसे का नुकसान
भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने एक कमेटी का गठन किया था। सत्यनारायण शर्मा अध्यक्ष बने। कमेटी ने जब सर्वें पूरा किया तो नतीजा आया कि 67 फीसदी जनता चाहती है कि स्काईवॉक बने।
स्काईवॉक को तोड़ना मतलब जनता के पैसे को नुकसान करना है। राजनीति करते हुए अपने ही सर्वें को कांग्रेस नेता भूल गए हैं। इस मुद्दे पर शुरू से भ्रम फैलाने का काम इन्होंने किया है। जनता चाहती है कि स्काईवॉक बने।


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